अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावों ने भारत-रूस और भारत-अमेरिका के बीच के कूटनीतिक संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। फरवरी 2026 की शुरुआत में ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने का ‘वचन’ दिया है, जिसके बदले अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगे भारी टैरिफ को कम किया है।
यहाँ इस पूरे विवाद, व्यापार समझौते और भारत की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
ट्रंप का दावा और ट्रेड डील: क्या है पूरा मामला?
| प्रमुख बिंदु | विवरण (Details) |
| ट्रंप का दावा | “भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा किया है और अब वह अमेरिका व वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।” |
| टैरिफ में राहत | अमेरिका ने भारत पर लगे 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है (जिसमें 25% का दंडात्मक शुल्क भी शामिल था)। |
| भारत का रुख | भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर “तेल खरीद बंद करने” की पुष्टि नहीं की है। |
| रूस का जवाब | रूस ने भारत को $11 प्रति बैरल तक की भारी छूट (Discount) का नया ऑफर दिया है। |
ट्रंप के दावे और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के बीच की स्थिति काफी पेचीदा है।
1. रूसी तेल के आयात में गिरावट: आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूसी तेल आयात वास्तव में कम हुआ है। जनवरी 2026 में यह 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) था, जिसके मार्च तक गिरकर 800,000 bpd होने का अनुमान है। यह गिरावट आंशिक रूप से अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण है।
2. भारत की ‘चुप्पी’ के मायने: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्रालय ने “तेल खरीद बंद करने” के सवाल पर सीधा जवाब देने से परहेज किया है। भारत का तर्क हमेशा ‘ऊर्जा सुरक्षा’ रहा है। जानकारों का मानना है कि भारत पूरी तरह खरीद बंद करने के बजाय इसे धीरे-धीरे कम कर सकता है ताकि अमेरिकी टैरिफ राहत भी बनी रहे और रूस से रिश्ते भी एकदम न टूटें।
3. रूस का ‘डिस्काउंट कार्ड’: भारत को अपने पाले में रखने के लिए रूस ने तेल पर छूट बढ़ाकर $11 प्रति बैरल कर दी है। यह पिछले साल की तुलना में तीन गुना अधिक है। भारत के लिए इस सस्ते तेल को पूरी तरह छोड़ना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
4. अमेरिका की निगरानी: ट्रंप ने वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक को निर्देश दिया है कि वे भारत की तेल खरीद की निगरानी (Monitor) करें। यदि भारत रूसी तेल की खरीद बढ़ाता है, तो 25% का दंडात्मक टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है।















