उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चर्चित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ (Ghooshkhor Pandit) को लेकर विवाद गहरा गया है। फिल्म के आपत्तिजनक शीर्षक और कथानक को लेकर लखनऊ पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। एक स्थानीय इंस्पेक्टर की शिकायत पर फिल्म के निर्माताओं और जुड़े हुए व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
यहाँ इस विवाद और पुलिसिया कार्रवाई का पूरा विवरण दिया गया है:
घटना का संक्षिप्त विवरण: पुलिस बनाम ‘घूसखोर पंडित’
| विवरण | जानकारी (Details) |
| मामला | फिल्म के टाइटल और पोस्टर पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप। |
| शिकायतकर्ता | पुलिस इंस्पेक्टर (स्वयं संज्ञान लेते हुए)। |
| थाना | लखनऊ (संबंधित कोतवाली)। |
| धाराएं | धारा 295A (धार्मिक भावनाएं आहत करना), 505 (सार्वजनिक उपद्रव) व अन्य। |
| मुख्य विवाद | जाति विशेष को भ्रष्टाचार (घूसखोरी) से जोड़ने वाला शीर्षक। |
लखनऊ पुलिस ने यह कदम तब उठाया जब फिल्म का पोस्टर और टीज़र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे समाज के एक विशेष वर्ग में भारी आक्रोश देखा गया।
विवाद के मुख्य कारण:
- धार्मिक और जातीय भावनाएं: फिल्म का शीर्षक ‘घूसखोर पंडित’ सीधे तौर पर एक विशेष समुदाय की गरिमा पर प्रहार करता पाया गया। शिकायतकर्ता इंस्पेक्टर के अनुसार, इस तरह के शीर्षक का उद्देश्य केवल सस्ता प्रचार (Publicity) पाना और समाज में वैमनस्य फैलाना है।
- पुलिस की FIR: लखनऊ के एक थाने में तैनात इंस्पेक्टर ने खुद वादी बनते हुए मामला दर्ज कराया है। उनका तर्क है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी धर्म या जाति को अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- कानूनी शिकंजा: पुलिस ने फिल्म के निर्देशक, निर्माता और सोशल मीडिया पर इसे प्रमोट करने वाली एजेंसी के खिलाफ आईटी एक्ट और आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि यह फिल्म सामाजिक शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
- डिलीट करने के निर्देश: पुलिस ने संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को पत्र लिखकर इस फिल्म के प्रोमो और पोस्टर्स को तुरंत हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
निर्माताओं का पक्ष: हालांकि, फिल्म से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि यह फिल्म केवल भ्रष्टाचार पर एक कटाक्ष (Satire) है, लेकिन शीर्षक के चयन ने इसे कानूनी पचड़े में डाल दिया है।
















