बजट 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को लेकर नियमों में हुआ बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में किसी बड़े टैक्स स्लैब बदलाव के बजाय अनुपालन (Compliance) और टैक्स स्ट्रक्चर की सफाई पर जोर दिया है।
यहाँ बजट 2026 के प्रमुख बदलावों और गोल्ड बॉन्ड पर नए नियमों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स छूट: अब क्या बदला?
| स्थिति | पुराना नियम (Old Rule) | नया नियम (New Rule – 1 अप्रैल 2026 से) |
| शुरुआती सब्सक्राइबर (Original Issue) | मैच्योरिटी (8 साल) पर पूरी छूट। | पूरी छूट बरकरार (यदि अंत तक होल्ड करें)। |
| सेकेंडरी मार्केट से खरीद (Stock Exchange) | मैच्योरिटी तक रखने पर टैक्स छूट मिलती थी। | अब छूट नहीं मिलेगी। मुनाफे पर टैक्स लगेगा। |
| समय से पहले बिक्री (Pre-mature Exit) | इंडेक्सेशन के साथ या बिना टैक्स लगता था। | टैक्स लगेगा (LTCG – 12.5% बिना इंडेक्सेशन)। |
करदाता (Taxpayer) के लिए क्या बदला?
इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन ‘आयकर अधिनियम 2025’ के रूप में एक नई व्यवस्था की नींव रखी गई है।
प्रमुख बदलाव:
- नया आयकर अधिनियम 2025: 1 अप्रैल 2026 से नया कानून लागू होगा, जिसका उद्देश्य टैक्स फाइलिंग को सरल बनाना है।
- रिटर्न संशोधन की समय सीमा: अब आप 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) संशोधित (Revise) कर सकेंगे (मामूली शुल्क के साथ)।
- विदेश यात्रा पर राहत (TCS): विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर TCS की दर 5% और 20% से घटाकर 2% कर दी गई है। यह यात्रियों के लिए बड़ी राहत है।
- एक्सीडेंट क्लेम पर छूट: मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा और टीडीएस (TDS) भी नहीं कटेगा।
- ट्रेडिंग हुई महंगी: फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT (Securities Transaction Tax) बढ़ा दिया गया है, जिससे शेयर बाजार में सट्टेबाजी कम करने की कोशिश की गई है।
















