मध्य प्रदेश में उपचुनावों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Voter List Revision) के बीच राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ‘फॉर्म 7’ का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक विस्तृत पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
यहाँ इस पूरे विवाद और कांग्रेस के आरोपों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
निर्वाचन प्रक्रिया में ‘फॉर्म 7’ का उपयोग मतदाता सूची से नाम कटवाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जाता है।
कांग्रेस के मुख्य आरोप (Key Allegations)
- सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग: कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता तकनीकी रूप से सक्रिय होकर विपक्षी समर्थकों और विशेष समुदायों के मतदाताओं के नाम सूची से हटवाने के लिए थोक में ‘फॉर्म 7’ भर रहे हैं।
- बिना सत्यापन के विलोपन: ईसीआई को लिखे पत्र में दावा किया गया है कि कई जगहों पर बीएलओ (BLO) बिना घर-घर जाकर सत्यापन किए, केवल ऑनलाइन फॉर्म के आधार पर नाम काट रहे हैं।
- फर्जी आपत्तियां: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जीवित और उसी स्थान पर रह रहे मतदाताओं को भी ‘मृत’ या ‘स्थानांतरित’ बताकर उनके नाम हटाने की साजिश रची जा रही है।
- प्रशासनिक मिलीभगत: पार्टी का कहना है कि निचले स्तर के कुछ अधिकारी सत्ताधारी दल के दबाव में कार्य कर रहे हैं।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और कानूनी सेल ने इस मामले को लेकर नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
कांग्रेस का पक्ष: कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि चुनाव से पहले हार के डर से भाजपा ‘वोटर लिस्ट’ के साथ छेड़छाड़ कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि काटे गए नामों को पुनः नहीं जोड़ा गया, तो पार्टी सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगी।
भाजपा की सफाई: दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण एक संवैधानिक प्रक्रिया है और पार्टी केवल फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए जागरूक नागरिक की भूमिका निभा रही है। भाजपा ने कांग्रेस पर ‘आधारहीन डर’ फैलाने का आरोप लगाया है।
चुनाव आयोग का रुख: आयोग ने पत्र मिलने की पुष्टि की है और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ‘फॉर्म 7’ के प्रत्येक आवेदन पर बीएलओ का व्यक्तिगत सत्यापन अनिवार्य है और किसी भी फर्जी विलोपन की स्थिति में संबंधित अधिकारी पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: मतदाता सूची की शुद्धता किसी भी लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। ‘फॉर्म 7’ पर छिड़ा यह विवाद आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिसका समाधान अब पूरी तरह निर्वाचन आयोग की सक्रियता पर निर्भर है।

















