रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आज जबलपुर (मध्य प्रदेश) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) और व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) के सहयोग से T-72 टैंकों (अजेय) का पहला पायलट ओवरहॉल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। आज, 28 जनवरी 2026 को इन पुनर्जीवित टैंकों का भव्य रोल-आउट समारोह आयोजित किया जा रहा है।
| विशेषता | विवरण |
| इंजन अपग्रेडation | टैंक के इंजन को पूरी तरह खोलकर उसकी शक्ति और दक्षता को नए जैसा किया गया है। |
| फायर कंट्रोल सिस्टम | अत्याधुनिक ‘नाइट विजन’ और सटीक निशाना लगाने वाली प्रणालियों का एकीकरण। |
| स्थानीय निर्माण | ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अधिकांश स्पेयर पार्ट्स का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया गया। |
| लागत में कमी | विदेश भेजने के बजाय स्वदेशी ओवरहॉल से करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत। |
अब तक T-72 टैंकों के बड़े ओवरहॉल के लिए सेना को भारी खर्च और समय गंवाना पड़ता था, लेकिन जबलपुर ने इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए साबित कर दिया है कि मध्य प्रदेश का यह ‘आयुध हब’ किसी भी जटिल चुनौती के लिए तैयार है।
मुख्य बिंदु:
- संयुक्त प्रयास: यह सफलता Armoured Vehicles Nigam Limited (AVNL) के नेतृत्व में गन कैरिज फैक्ट्री और व्हीकल फैक्ट्री के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के दिन-रात के परिश्रम का परिणाम है।
- सख्त परीक्षण: रोल-आउट से पहले इन टैंकों का परीक्षण जबलपुर के खमरिया रेंज में किया गया, जहाँ इन्होंने सभी तकनीकी मानकों और ‘फायरिंग टेस्ट’ को सफलतापूर्वक पार किया।
- रणनीतिक महत्व: T-72 टैंक भारतीय थल सेना की रीढ़ हैं। इनका समय पर ओवरहॉल होना सीमाओं पर सेना की मारक क्षमता को बरकरार रखने के लिए अनिवार्य है। जबलपुर अब भविष्य में T-90 ‘भीष्म’ टैंकों के ओवरहॉल की जिम्मेदारी लेने के लिए भी तैयार है।
निष्कर्ष: आज का रोल-आउट केवल टैंकों का बाहर निकलना नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की जीत है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी कौशल बढ़ेगा, बल्कि भारतीय सेना की परिचालन तैयारी (Operational Readiness) को भी नई मजबूती मिलेगी।
















