हादसों का विवरण: एक दर्दनाक संयोग
पिछले कुछ महीनों में भारतीय विमानन क्षेत्र ने दो ऐसी त्रासदियां देखीं जिन्होंने देश को झकझोर कर रख दिया है।
| विवरण (Details) | विजय रूपाणी (12 जून 2025) | अजीत पवार (28 जनवरी 2026) |
| स्थान | अहमदाबाद, गुजरात | बारामती, महाराष्ट्र |
| विमान का प्रकार | एयर इंडिया (बोइंग 787 ड्रीमलाइनर) | चार्टर प्लेन (Learjet 45) |
| परिस्थिति | उड़ान भरते समय तकनीकी खराबी। | लैंडिंग के समय अनियंत्रित होकर विस्फोट। |
| कुल हताहत | 241 यात्री (विमान में सवार)। | 5 लोग (अजीत पवार सहित चालक दल)। |
मीडियावाला की इस रिपोर्ट में राजेश जयंत ने रेखांकित किया है कि कैसे बार-बार होने वाले ये हादसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
मुख्य चिंताएं:
- चार्टर विमानों का रखरखाव: अजीत पवार जिस Learjet 45 में सवार थे, वह लैंडिंग के समय थ्रेशोल्ड पर अनियंत्रित हो गया और उसमें विस्फोट हो गया। क्या चार्टर विमानों के फिटनेस सर्टिफिकेट (Airworthiness) की जांच में कोताही बरती जा रही है?
- VVIP प्रोटोकॉल: विजय रूपाणी और अजीत पवार जैसे कद्दावर नेताओं की उड़ानों के लिए क्या मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन हुआ? बारामती में लैंडिंग के समय खराब दृश्यता (Visibility) के बावजूद लैंडिंग का निर्णय क्यों लिया गया?
- सिस्टम की विफलता: सीडीएस बिपिन रावत से लेकर माधवराव सिंधिया और अब इन दो बड़े नेताओं तक, विमान हादसों की सूची लंबी होती जा रही है। विपक्षी नेताओं, जिनमें ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं, ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
निष्कर्ष: 226 दिनों के अंतराल में दो शक्तिशाली नेताओं का इस तरह चले जाना केवल एक ‘संयोग’ नहीं हो सकता। यह समय ‘ब्लैक बॉक्स’ की जांच से आगे बढ़कर पूरे विमानन ढांचे की सुरक्षा समीक्षा (Safety Audit) करने का है ताकि भविष्य में ऐसी राष्ट्रीय क्षति को रोका जा सके।















