मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए भारी नुकसान के बाद राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संकट की इस घड़ी में अन्नदाताओं को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और RBC 4-4 के संशोधित प्रावधानों के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
मुआवजे का नया गणित: किसे कितना मिलेगा?
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सर्वे का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। मुआवजे की दरें नुकसान के प्रतिशत के आधार पर तय की गई हैं:
| नुकसान का प्रतिशत (Damage %) | मुआवजा राशि (प्रति हेक्टेयर) |
| 50% से अधिक (100% क्षति मानी जाएगी) | ₹32,000 |
| 33% से 50% के बीच | ₹16,000 |
| 25% से 33% के बीच | ₹9,500 |
राजस्व मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए कहा कि सरकार ने जिला कलेक्टरों को 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और तत्काल सर्वे के निर्देश दिए हैं।
मुख्य बिंदु:
- पारदर्शी सर्वे: मंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि पटवारी और राजस्व विभाग की टीम खेतों में जाकर ‘स्पॉट सर्वे’ करे। सर्वे की सूची पंचायत भवन में चस्पा की जाएगी ताकि किसी भी विसंगति पर किसान आपत्ति दर्ज करा सकें।
- बीमा का अतिरिक्त लाभ: यह मुआवजा राशि (राहत राशि) फसल बीमा योजना (PMFBY) के दावों के अतिरिक्त होगी। यानी किसानों को सरकार की ओर से राहत भी मिलेगी और बीमा कंपनी से दावा भी।
- कर्ज वसूली पर रोक: जिन क्षेत्रों में 50% से अधिक नुकसान हुआ है, वहां किसानों से अल्पकालीन ऋण की वसूली स्थगित की जा सकती है और उनके ब्याज का बोझ भी सरकार द्वारा वहन करने पर विचार किया जा रहा है।
- हॉर्टिकल्चर भी शामिल: केवल गेहूं और चना ही नहीं, बल्कि सब्जी और फलों (उद्यानिकी फसलों) को हुए नुकसान का भी सर्वे कर मुआवजा दिया जाएगा।
निष्कर्ष: करण सिंह वर्मा ने किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा, “किसान भाई चिंता न करें, आपकी मेहनत का एक-एक पैसा मुआवजे के रूप में आप तक पहुँचाना हमारी सरकार की प्राथमिकता
















