गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ‘सनातन’ के बहाने निशाना साधने की खबरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं, लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। राजनीतिक विश्लेषकों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच किसी भी तरह के मतभेद की खबरें निराधार हैं।
हाल ही में अमित शाह ने एक संबोधन में ‘सनातन धर्म’ की व्यापकता और ‘समावेशी राष्ट्रवाद’ पर बात की थी। कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स और विपक्षी गलियारों में इसे योगी आदित्यनाथ के ‘कठोर हिंदुत्व’ के ब्रांड पर परोक्ष कटाक्ष (Veiled Attack) के रूप में पेश किया गया।
| पहलू | वास्तविकता (Reality) |
| बयान का संदर्भ | अमित शाह का बयान विपक्षी दलों (जैसे उदयनिधि स्टालिन के पुराने बयान) के खिलाफ था, न कि अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के खिलाफ। |
| विचारधारा | भाजपा और संघ (RSS) की विचारधारा में ‘सनातन’ और ‘राष्ट्रवाद’ पूरक हैं। योगी और शाह दोनों इसी विचार को अलग-अलग मंचों से मजबूती देते हैं। |
| राजनीतिक तालमेल | उत्तर प्रदेश के आगामी विकास लक्ष्यों और संगठनात्मक बैठकों में दोनों नेताओं को अक्सर साथ और एक-दूसरे की प्रशंसा करते देखा गया है। |
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की खबरें अक्सर ‘डिविज़नरी नरेटिव’ (फूट डालने वाली कहानी) के तहत फैलाई जाती हैं।
मुख्य बिंदु:
- एकजुट नेतृत्व: अमित शाह ने कई बार सार्वजनिक मंचों से योगी आदित्यनाथ के ‘कानून व्यवस्था’ मॉडल की सराहना की है। ऐसे में ‘निशाना साधने’ की बात तर्कसंगत नहीं लगती।
- सनातन पर एक राय: सनातन धर्म को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में कोई मतभेद नहीं है। योगी आदित्यनाथ जहाँ इसे ‘राष्ट्रीय धर्म’ बताते हैं, वहीं अमित शाह इसे ‘भारत की आत्मा’ कहते हैं। दोनों के शब्दों में अंतर हो सकता है, लेकिन संदेश एक ही है।
- चुनावों की तैयारी: 2026 और आने वाले समय के चुनावों को देखते हुए, भाजपा के भीतर गुटबाजी दिखाना विरोधियों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। असल में, संगठन के भीतर समन्वय (Coordination) के लिए शाह और योगी लगातार संवाद में रहते हैं। [Image showing PM Modi, Amit Shah, and Yogi Adityanath in a core committee meeting]
निष्कर्ष: अमित शाह के बयान को योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बताना पूरी तरह से भ्रामक है। भाजपा के ये दोनों दिग्गज नेता पार्टी के ‘कोर’ स्तंभ हैं और उनकी बयानबाजी का लक्ष्य विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) के वैचारिक प्रहारों का जवाब देना होता है।















