कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने हालिया संबोधन में भाजपा की नीतियों को ‘अमीर-केंद्रित’ करार दिया। उन्होंने कहा कि देश में दो भारत बन रहे हैं—एक अरबपतियों का और दूसरा उन करोड़ों लोगों का जो महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।
| मुद्दा | राहुल गांधी का तर्क |
| डबल इंजन | एक इंजन दिल्ली (मोदी) और दूसरा राज्यों का, दोनों मिलकर सिर्फ बड़े उद्योगों की मदद कर रहे हैं। |
| कर्ज माफी | उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये माफ किए गए, लेकिन किसानों को राहत नहीं मिली। |
| GST/नोटबंदी | इन फैसलों ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी ताकि ‘मित्रों’ का एकाधिकार (Monopoly) बन सके। |
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘डबल इंजन’ शब्द को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकारें बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और संसाधनों को चुनिंदा उद्योगपतियों को सौंप रही हैं।
मुख्य तर्क:
- संसाधनों का केंद्रीकरण: राहुल ने कहा कि हवाई अड्डे, बंदरगाह और बिजली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र कुछ विशिष्ट हाथों में सिमट गए हैं। उनका दावा है कि ‘डबल इंजन’ की ताकत का इस्तेमाल इन बड़े घरानों के लिए रास्ता साफ करने में किया जा रहा है।
- रोजगार का संकट: उन्होंने तर्क दिया कि जब छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) तबाह हो जाते हैं, तो रोजगार के अवसर भी खत्म हो जाते हैं। भाजपा की नीतियां केवल ‘कैपिटल इंटेंसिव’ हैं, ‘लेबर इंटेंसिव’ नहीं। [Image showing wealth inequality gap in India]
- जाति जनगणना का मुद्दा: राहुल ने इसे सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि जब तक जाति जनगणना नहीं होती, तब तक यह पता नहीं चलेगा कि इस ‘डबल इंजन’ की कमाई का हिस्सा पिछड़े, दलितों और आदिवासियों तक पहुँच रहा है या नहीं।
भाजपा का पलटवार: भाजपा ने राहुल गांधी के इन आरोपों को ‘झूठ की राजनीति’ करार दिया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि डबल इंजन सरकार का मतलब ‘कल्याणकारी योजनाओं’ का तेजी से क्रियान्वयन है, जिससे करोड़ों गरीबों को मुफ्त राशन, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
यह सियासी टकराव आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में और तेज होने की उम्मीद है, जहाँ कांग्रेस आर्थिक असमानता को अपना मुख्य हथियार बना रही है।















