छत्तीसगढ़ में मनरेगा भुगतान और रोजगार के आंकड़ों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने अपने दौरे के दौरान साय सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने और मजदूरों का हक मारने का आरोप लगाया था। इस पर पलटवार करते हुए प्रदेश के कृषि एवं आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने उन्हें ‘भ्रम फैलाने वाला’ करार दिया है।
| नेता | दल | मुख्य आरोप/बयान |
| सचिन पायलट | कांग्रेस | सरकार जानबूझकर मनरेगा का बजट कम कर रही है और मजदूरों का भुगतान रोक रही है। |
| रामविचार नेताम | भाजपा | पायलट केवल पर्यटन के लिए छत्तीसगढ़ आते हैं; उन्हें यहाँ के विकास कार्यों की जानकारी नहीं है। |
मंत्री रामविचार नेताम ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि सचिन पायलट छत्तीसगढ़ में केवल राजनीतिक पर्यटन पर आते हैं। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब मनरेगा में भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड बने थे, लेकिन अब ‘डबल इंजन’ की सरकार में पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है।
नेताम के तीखे प्रहार:
- पर्यटक का तमगा: नेताम ने कहा, “सचिन पायलट बाहर से आकर यहाँ की भोली-भाली जनता और मनरेगा कर्मियों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें दिल्ली या राजस्थान से बैठकर छत्तीसगढ़ के जमीनी हालात का अंदाजा नहीं है।”
- भुगतान का दावा: मंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार ने लंबित मानदेय और मजदूरी का भुगतान प्रक्रिया में ले लिया है और कांग्रेस शासन काल की विसंगतियों को दूर किया जा रहा है।
- चुनावी तैयारी: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह आक्रामक रुख आगामी स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों को देखते हुए है, जहाँ ग्रामीण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
“कांग्रेस के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे सफल योजनाओं पर भी सवाल उठाकर अपनी खोई हुई जमीन तलाश रहे हैं।” – रामविचार नेताम
दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि वे सड़क से सदन तक मनरेगा कर्मियों की लड़ाई लड़ेंगे। सचिन पायलट के दौरे ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा है, लेकिन भाजपा इसे ‘फ्लॉप शो’ बता रही है। छत्तीसगढ़ की इस राजनीतिक जंग में अब मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि दोनों दलों के लिए अपनी साख साबित करने का जरिया बन गई है।

















