नर्मदापुरम (पूर्व नाम होशंगाबाद) स्थित सिक्योरिटी पेपर मिल (SPM) अब दुनिया के सबसे उन्नत करेंसी पेपर उत्पादन केंद्रों में शुमार होने जा रही है। केंद्र सरकार ने ₹1,788 करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ इस मिल के विस्तार और तकनीकी अपग्रेडेशन को मंजूरी दे दी है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य विदेशी कागज़ पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है।
क्या है विस्तार योजना? (Key Highlights)
- नई प्रोडक्शन लाइन: मिल में एक नई सिलिंड्रिकल मोल्ड वॉटरमार्क बैंकनोट (CWBN) पेपर उत्पादन लाइन स्थापित की जाएगी।
- क्षमता में भारी वृद्धि: इस नई लाइन की सालाना क्षमता 6,000 मीट्रिक टन होगी। इसके चालू होने के बाद, SPM की कुल उत्पादन क्षमता 7,500 टन से बढ़कर 12,000 टन सालाना हो जाएगी।
- पुरानी मशीनों की विदाई: यह नई हाईटेक मशीनरी 1970 के दशक से चल रही पुरानी और जर्जर मशीनों की जगह लेगी।
- पर्यावरण के अनुकूल: नई तकनीक न केवल बिजली बचाएगी, बल्कि इसमें वॉटर-सेविंग (जल संरक्षण) सिस्टम भी लगा होगा।
वर्तमान में भारत अपनी मुद्रा (Currency) और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों जैसे पासपोर्ट और स्टांप पेपर के लिए काफी हद तक विशेष कागज़ का आयात करता है। नर्मदापुरम में होने वाला यह विस्तार इस आयात बिल को कम करने में गेम-चेंजर साबित होगा।
बहुआयामी लाभ:
- करेंसी और पासपोर्ट: इस यूनिट में न केवल 100 से 500 रुपये तक के नोटों का हाई-क्वालिटी कागज़ बनेगा, बल्कि देश में हर साल जारी होने वाले लगभग 1.4 करोड़ पासपोर्ट के लिए जरूरी विशेष कागज़ का उत्पादन भी यहीं किया जाएगा।
- रणनीतिक सुरक्षा: करेंसी पेपर का स्वदेशी उत्पादन देश की वित्तीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। अपना कागज़ होने से जाली नोटों (Counterfeit) के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।
- रोजगार और अर्थव्यवस्था: इस बड़े निवेश से स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल वाले युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
भविष्य की तैयारी: केंद्र सरकार ने वैश्विक निविदा (Global Tender) के जरिए अत्याधुनिक मशीनों की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हाल ही में मिल में सामने आए कुछ प्रशासनिक घोटालों (जैसे फर्जी भर्ती और मेडिकल क्लेम मामला) के बावजूद, सरकार का यह बड़ा निवेश दर्शाता है कि नर्मदापुरम की यह इकाई भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी रहेगी।
यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक सशक्त उदाहरण है, जहाँ नर्मदा के तट पर तैयार हुआ कागज़ पूरी दुनिया में भारत की साख बढ़ाएगा।















