| विवरण | जानकारी |
| मरीजों की उम्र | 14 माह (दो बच्चियां) |
| प्राथमिक अस्पताल | चचा नेहरू अस्पताल, इंदौर |
| लक्षण | लगातार उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की भारी कमी (Dehydration) |
| संभावित कारण | दूषित जल आपूर्ति (Toxic Water Supply) |
शहर में जारी ‘जहरीला पानी कांड’ अब बस्तियों से निकलकर घरों के भीतर मासूमों को निशाना बना रहा है। परिजनों का आरोप है कि कॉलोनी में पिछले कई दिनों से मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा था। बच्चियों को उबला हुआ पानी देने के बावजूद वे संक्रमण की चपेट में आ गईं।
चिकित्सकीय स्थिति: चचा नेहरू अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, बच्चियों के शरीर में संक्रमण का स्तर काफी बढ़ गया था, जिससे उनके महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव पड़ रहा था। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें ‘स्टेबलाइज’ किया गया, लेकिन निरंतर निगरानी और वेंटिलेटर/आईसीयू की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें निजी अस्पताल भेजा गया।
“बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम होती है, ऐसे में दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।” – वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
कॉलोनी में आक्रोश: इस घटना के बाद कॉलोनी के निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि नगर निगम केवल खानापूर्ति के लिए टैंकर भेज रहा है, जबकि समस्या की जड़ लीक हो रही ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइनें हैं। जब 14 माह के बच्चे इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि प्रशासन की लापरवाही अब अक्षम्य (Unforgivable) हो चुकी है।
इंदौर में अब तक इस जल संकट से 17 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, और अब मासूमों का इस तरह गंभीर होना शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था और नगर निगम के दावों पर एक काला धब्बा है। शहर के लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि शुद्ध पेयजल की तत्काल बहाली की मांग कर रहे हैं।
















