देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में 17 लोगों की जान जाने के बाद अब संवेदनाओं की जगह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन ने ले ली है। जहाँ एक ओर सत्ताधारी दल के विधायक इस त्रासदी को आध्यात्मिक मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे प्रशासन की ‘नींद’ उड़ाने का अवसर मान रहा है।
| पक्ष | प्रमुख चेहरा | क्रिया (Action) | उद्देश्य/तर्क |
| भाजपा (BJP) | विधायक रमेश मेंदोला | डीजे पर ऊंचे स्वर में ‘आरती’ चलाना। | शहर की शुद्धि और शांति के लिए आध्यात्मिक प्रयास। |
| कांग्रेस (Congress) | स्थानीय नेता एवं कार्यकर्ता | सड़कों पर उतरकर ‘घंटा’ बजाना। | सोए हुए प्रशासन और नगर निगम को जगाने का प्रतीक। |
इंदौर के प्रभावित इलाकों में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। भाजपा विधायक रमेश मेंदोला (दादा) के नेतृत्व में समर्थकों ने बड़े-बड़े डीजे और साउंड सिस्टम लगाकर सड़कों पर ‘आरती’ का आयोजन किया। भाजपा का तर्क है कि वे शहर के कल्याण और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह मुख्य मुद्दे (दूषित पानी और पाइपलाइन की खराबी) से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए ‘घंटानाद’ आंदोलन शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इंदौर नगर निगम की लापरवाही ने 17 घरों के चिराग बुझा दिए हैं। घंटे बजाकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रशासन अपनी गहरी नींद से जागे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। कांग्रेस ने नगर निगम आयुक्त के इस्तीफे और मृतकों के परिजनों के लिए भारी मुआवजे की मांग की है।
इस ‘शोर’ के बीच इंदौर की आम जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। निवासियों का कहना है कि जब उन्हें शुद्ध पेयजल की जरूरत थी, तब कोई नहीं आया, और अब मौतों पर राजनीति की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दूषित पानी से होने वाले संक्रमण (जैसे हैजा या गैस्ट्रोएंटेराइटिस) का खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में डीजे और प्रदर्शनों की भीड़ संक्रमण के खतरे को और बढ़ा सकती है। प्रशासन अब दोनों पक्षों को शांत कराने और पेयजल लाइनों को दुरुस्त करने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

















