बिहार की राजनीति में इन दिनों एक दुर्लभ दृश्य देखने को मिल रहा है—पुरानी प्रतिद्वंद्विता का अंत और एक नए राजनीतिक समन्वय का उदय। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता और भविष्य की सराहना करते हुए कहा कि “सम्राट बहुत आगे जाएंगे।” मुख्यमंत्री के इस बयान ने न केवल गठबंधन की मजबूती को दर्शाया, बल्कि सम्राट चौधरी को भविष्य के बड़े नेता के रूप में भी स्थापित कर दिया है।
शकुनी चौधरी की मुस्कान और ‘सपना’
अपने बेटे की तारीफ सुनकर बिहार की राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले शकुनी चौधरी के चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान तैर गई। वर्षों तक बिहार की सत्ता और राजनीति के केंद्र में रहे शकुनी चौधरी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा:
“हर पिता का सपना होता है कि उसका बेटा उससे भी आगे निकले। आज जब मुख्यमंत्री खुद सम्राट की काबिलियत की तारीफ कर रहे हैं, तो मुझे लग रहा है कि मेरा सपना पूरा हो गया। सम्राट ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।
नीतीश कुमार का यह बयान महज एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बिहार के आगामी राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक बड़ा संकेत है। सम्राट चौधरी, जो कभी नीतीश कुमार के प्रखर विरोधी माने जाते थे और जिन्होंने नीतीश को सत्ता से हटाने तक अपनी पगड़ी न खोलने की कसम खाई थी, आज उन्हीं के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक बनकर उभरे हैं।
इस प्रशंसा के मायने:
- NDA में समन्वय: यह बयान JDU और BJP के बीच के ‘ऑल इज वेल’ संदेश को कार्यकर्ताओं तक पहुँचाता है।
- नेतृत्व की स्वीकार्यता: नीतीश कुमार का सम्राट को ‘आगे जाने’ का आशीर्वाद देना, उन्हें बिहार भाजपा के निर्विवाद चेहरे और भविष्य के संभावित मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार्यता प्रदान करता है।
- लव-कुश समीकरण: बिहार की राजनीति में लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए नीतीश और सम्राट की यह जुगलबंदी काफी अहम मानी जा रही है।
शकुनी चौधरी, जिन्होंने खुद सात बार विधायक और सांसद के रूप में क्षेत्र की सेवा की, अब अपने बेटे को उस ऊंचाई पर देख रहे हैं जिसका उन्होंने कभी सपना देखा था। सम्राट चौधरी के कंधों पर अब न केवल अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, बल्कि नीतीश कुमार के भरोसे और बिहार की जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरने की भी बड़ी चुनौती है।














