जिले के प्रभारी मंत्री ने हाल ही में मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान कॉलेज डीन को कड़ी फटकार लगाई, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। मंत्री कॉलेज की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा करने पहुंचे थे, लेकिन मौके पर स्थिति उम्मीद के बिल्कुल विपरीत नजर आई।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने देखा कि अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है, मरीजों को समय पर इलाज और जानकारी नहीं मिल पा रही है और कई वार्डों में स्टाफ की कमी बनी हुई है। इसके अलावा दवाओं की उपलब्धता, उपकरणों की कार्यशीलता और रिकॉर्ड संधारण में भी गंभीर खामियां पाई गईं।
इन कमियों को देखकर प्रभारी मंत्री भड़क गए और सीधे मेडिकल कॉलेज के डीन से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को बेहतर बना रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका लाभ आम मरीज तक नहीं पहुंच पा रहा है। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रभारी मंत्री ने डीन को निर्देश दिए कि मरीजों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सभी खामियों को तय समय सीमा में दूर किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि दोबारा ऐसी शिकायतें सामने आईं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। माना जा रहा है कि इस फटकार के बाद अस्पताल प्रबंधन अब व्यवस्थाएं सुधारने में तेजी दिखा सकता है। यह मामला एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।














