मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके सरसंघचालक मोहन भागवत को लेकर एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। विपक्ष द्वारा संघ और उसकी विचारधारा पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच, सत्ता पक्ष और संघ के समर्थकों ने एक बेहद तीखे और व्यंग्यात्मक लहजे में पलटवार किया है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी राजनीतिक विरोधी महज बयानबाजी या ‘गिली-गिली छू’ (जादू की छड़ी) से मोहन भागवत या संघ के प्रभाव को खत्म नहीं कर सकता।
राजनीतिक बयानबाजी के मुख्य बिंदु:
- विपक्ष का दुष्प्रचार: हाल के दिनों में विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने संघ प्रमुख के बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और आरएसएस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की कोशिश की है।
- ‘गिली-गिली छू’ का संदेश: इस मुहावरे का इस्तेमाल विपक्ष की उस ‘मुंगेरीलाल की हसीन सोच’ पर तंज कसने के लिए किया गया है, जो यह मानते हैं कि उनके आधारहीन आरोपों से संघ का वजूद मिट जाएगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि आरएसएस कोई जादुई भ्रम नहीं है जिसे किसी मंत्र से गायब किया जा सके।
- जमीनी स्तर पर गहरी पैठ: मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में संघ की जड़ें समाज के अंतिम व्यक्ति तक फैली हुई हैं। शिक्षा, सेवा, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवक दशकों से निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे राज्य में अहम चुनाव या बड़े सियासी घटनाक्रम करीब आते हैं, विपक्ष जानबूझकर संघ को निशाने पर लेता है ताकि ध्रुवीकरण किया जा सके। हालांकि, इस तरह के तीखे पलटवार से यह साफ है कि सत्ता पक्ष बैकफुट पर जाने के बजाय आक्रामक रुख अपना रहा है।
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