मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रिहायशी इलाकों (Residential Areas) में संचालित हो रहीं व्यावसायिक गतिविधियों पर भोपाल नगर निगम (BMC) की सख्त सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है। नगर निगम द्वारा 8,000 से अधिक दुकानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे की सीलिंग का अंतिम अल्टीमेटम (Notice) दिए जाने के बाद व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है।
रोशनपुरा चौराहा, अवधपुरी और बागसेवानिया समेत राजधानी के प्रमुख बाजारों में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर रैली निकाली और “व्यापार बचाओ, रोजगार बचाओ” के जोरदार नारे लगाए।
व्यापारियों का प्रदर्शन और मुख्य मांगें
- ‘रोशनपुरा चौराहा’ किया जाम: व्यापारियों ने शहर के सबसे व्यस्त रोशनपुरा चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और कर्मचारी भी शामिल थे। पुलिस ने सीएम हाउस की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग कर रोका।
- ‘रोजगार बचाओ’ की गुहार: व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से नगर निगम को कमर्शियल टैक्स और बिजली बिल का भुगतान करते आ रहे हैं। त्योहारों के सीजन में दुकानों को अचानक सील किए जाने से हजारों परिवारों का रोजगार और आजीविका सीधे खतरे में पड़ गई है।
- मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज (Mixed Land-Use) की मांग: द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, व्यापारी संगठनों ने सरकार से भोपाल के नए सिटी मास्टर प्लान (Master Plan) को तत्काल लागू करने और 18 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित (Regularise) करने के लिए नीति बनाने की मांग की है।
क्यों हो रही है सीलिंग कार्रवाई?
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों के बाद भोपाल नगर निगम ने शहर के 6 विधान सभा क्षेत्रों में 62,000 से अधिक रिहायशी संपत्तियों का सर्वे किया था। इनमें बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर 8,000 से ज्यादा संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर, अरेरा कॉलोनी, गुलमोहर और बावडिया कलां की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) का तर्क है कि रिहायशी इलाकों में अवैध दुकानों से ट्रैफिक जाम, शोर और अतिक्रमण की गंभीर समस्या पैदा हो रही है।












