मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (झीलों की नगरी) में आज 5 अगस्त 2026 से चार दिवसीय BRICS संस्कृति कार्य समूह (3rd Culture Working Group) और BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक का भव्य आगाज हो रहा है। भारत की BRICS अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत आयोजित हो रहे इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई सहित 11 सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री, उप मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करना, विरासत संरक्षण, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और यूनेस्को (UNESCO) स्तर पर संयुक्त सहयोग को बढ़ावा देना है।
🌐 बैठक के 2 मुख्य और दूरगामी प्रस्ताव (Key Proposals):
- कॉमन BRICS डिजिटल हेरिटेज प्लेटफॉर्म (Common BRICS Digital Platform):
- भारत द्वारा पेश इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव के तहत एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा।
- इस प्लेटफॉर्म पर सदस्य देशों के कलाकारों की डायरेक्टरी, सांस्कृतिक व रचनात्मक उद्योगों की जानकारी, दुर्लभ पांडुलिपियों (Manuscripts) का डिजिटल रिकॉर्ड और ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत का साझा डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
- UNESCO में संयुक्त और बहुराष्ट्रीय नामांकन (Joint UNESCO Nominations):
- वर्तमान नियमों के अनुसार प्रत्येक देश प्रतिवर्ष केवल एक राष्ट्रीय यूनेस्को नामांकन ही जमा कर सकता है।
- भारत ने BRICS देशों के साथ मिलकर संयुक्त/बहुराष्ट्रीय नामांकन (Multinational Nominations) का प्रस्ताव रखा है। इस पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट मानसून’ (Project Monsoon) जैसी परियोजनाओं के जरिए दक्षिण-पूर्व और मध्य एशियाई देशों के साथ साझा बौद्ध परंपराओं और मंदिर वास्तुकला को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने पर काम होगा।
📋 4 दिवसीय सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम:
- 5 व 6 अगस्त (वर्किंग ग्रुप मीटिंग): नीतिगत रूपरेखा, सांस्कृतिक संपत्ति की अवैध तस्करी रोकने, क्रिएटिव इकोनॉमी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट नियमों के प्रभाव पर आधिकारिक चर्चा होगी।
- 6 व 7 अगस्त (BRICS सांस्कृतिक महोत्सव): भोपाल के रवींद्र भवन में 11 देशों के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
- 7 व 8 अगस्त (मंत्रिस्तरीय सम्मेलन): BRICS देशों के संस्कृति मंत्रियों के बीच अंतिम सहमति और भोपाल घोषणापत्र पर मुहर लगेगी।
🏞️ विदेशी प्रतिनिधियों के लिए MP के व्यंजनों और धरोहरों का खास अनुभव
प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत से रूबरू कराने के लिए विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को साइट्स सांची के स्तूप और भीमबेटका की गुफाओं के भ्रमण के साथ-साथ भोपाल के जनजातीय संग्रहालय (Tribal Museum) का भ्रमण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त खान-पान में पारंपरिक दाल बाफला, निमोना, चंबल का थोपा, रिकमच और मिलेट्स (कोदो-कुटकी) आधारित व्यंजनों की विशेष व्यवस्था की गई है।












