सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद रिहायशी इलाकों में चल रहीं अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ भोपाल नगर निगम (BMC) की सीलिंग कार्रवाई विवादों में घिर गई है। शहर के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और 10 नंबर मार्केट जैसे पॉश इलाकों में स्थानीय रहवासियों और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने निगम प्रशासन पर पक्षपात (Selective Action) और प्रभावशालियों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
विवाद तब और गहरा गया जब रहवासियों ने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ मंत्री के करीबी रिश्तेदार द्वारा रिहायशी भूखंड पर संचालित किए जा रहे लग्जरी बुटीक को कार्रवाई के दायरे से बाहर रखा गया, जबकि छोटे व्यापारियों और फुटपाथ विक्रेताओं पर तत्काल कार्रवाई की गई।
🔥 रहवासियों के मुख्य आरोप और ज़मीनी हकीकत:
- प्रभावशाली लोगों को रियायत, आम व्यापारियों पर गाज: संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का आरोप है कि बीएमसी अधिकारियों ने केवल ‘खानापूर्ति’ और कागजी रिकॉर्ड दिखाने के लिए छोटे वेंडरों व कुछ दुकानों पर पोस्टर चिपकाकर औपचारिकता पूरी की, जबकि बड़े व्यावसायिक परिसरों और मंत्री-नेताओं के रिश्तेदारों के शोरूम-बुटीक खुले रहे।
- ‘शाम होते ही खुली दुकानें’: रहवासियों ने दावा किया कि निगम की टीम दिन में सीलिंग की कार्रवाई का नाटक करती है और शाम होते ही दुकानें फिर से सामान्य रूप से संचालित होने लगती हैं।
- सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दर्ज करने की तैयारी: बीएमसी की इस ढुलमुल और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से नाराज रहवासी कल्याण संघों (RWA) ने चेतावनी दी है कि वे नगर निगम के आला अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मानहानि/अवमानना (Contempt Petition) याचिका दायर करेंगे।
व्यापारियों की मांग और मास्टर प्लान का पेंच
दूसरी ओर, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI) ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि जब तक शहर का नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो जाता, तब तक इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। व्यापारियों का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद से मास्टर प्लान अपडेट न होने के कारण मजबूरी में रिहायशी क्षेत्रों में दुकानें खोलनी पड़ीं। वे गुजरात मॉडल की तर्ज पर मुख्य सड़कों पर ‘मिक्स लैंड यूज’ (Mixed Land Use) नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं।
4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में पेश होनी है रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार व बीएमसी को 4 अगस्त 2026 तक रिहायशी इलाकों से व्यावसायिक गतिविधियां हटाने की अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) अदालत में जमा करनी है। ऐसे में जनता द्वारा लगाए गए पक्षपात के आरोपों ने नगर निगम और प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।












