अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों की आग अब दुनियाभर के पेट्रोल पंपों तक पहुंच गई है। 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुका है और अगर हालात नहीं सुधरे तो यह 120 डॉलर तक जा सकता है।
दुनिया के 95 देशों में पेट्रोल महंगा
जंग शुरू होने के बाद से अब तक दुनिया के कम से कम 95 देशों में पेट्रोल की कीमतें बढ़ चुकी हैं। सबसे बड़ा झटका यूरोप को लगा है जहां डीजल की औसत कीमत 20 फीसदी तक उछल गई है। अमेरिका में फरवरी में एक गैलन पेट्रोल 2.94 डॉलर था जो अब 3.58 डॉलर तक पहुंच गया है यानी पूरे 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी। कैलिफोर्निया में तो यह 5 डॉलर प्रति गैलन को भी पार कर गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना असली खलनायक
इस पूरे संकट की जड़ है होर्मुज जलडमरूमध्य — वह संकरा समुद्री रास्ता जिसके जरिए दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति होती है। युद्ध के कारण इस रूट पर टैंकर हमले और शिपिंग बाधाएं इतनी बढ़ गई हैं कि सैकड़ों तेल टैंकर समुद्र में फंसे पड़े हैं। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।
भारत में अभी स्थिर, लेकिन होली से पहले बड़े झटके की आशंका
भारत अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। फिलहाल सरकारी तेल कंपनियां नुकसान उठाकर भी कीमतें स्थिर रख रही हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और मुंबई में 103.50 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है। लेकिन जानकारों का कहना है कि होली से पहले कंपनियां 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
पड़ोसी देशों का हाल बेहाल
भारत के पड़ोसी देशों पर इस जंग की मार ज्यादा पड़ रही है। पाकिस्तान में सरकारी दफ्तर चार दिन के हफ्ते पर आ गए हैं, स्कूल बंद हो गए हैं और 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम लागू कर दी गई है। बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए सभी विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं।

















