मिडल ईस्ट में जारी युद्ध अब हिंद महासागर तक फैल चुका है। ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने और उसमें सवार नाविकों की मौत के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई है। वहीं, भारत के लिए राहत की खबर है कि ब्लॉकहेड के बावजूद एलपीजी टैंकर सुरक्षित निकल रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की आग अब भारत के समुद्री पड़ोस तक पहुँच गई है। 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डूबाए गए ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के 84 नाविकों के शव कल श्रीलंका से ईरान भेजे गए। ईरान ने इसे “युद्ध अपराध” बताते हुए भीषण बदले की चेतावनी दी है। इस बीच, खाड़ी देशों में जारी तनाव के बावजूद भारत के लिए अच्छी खबर है कि भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित रास्ता मिल रहा है।
| विवरण | ताजा जानकारी (14 मार्च 2026) |
| IRIS Dena मामला | श्रीलंका ने 84 ईरानी नाविकों के शवों को स्वदेश रवाना किया; 87 की मौत की पुष्टि |
| ईरान की चेतावनी | आर्मी चीफ और विदेश मंत्रालय ने कहा- “इस जघन्य अपराध को न भुलाएंगे, न माफ करेंगे” |
| भारतीय LPG टैंकर | भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ (Shivalik) ने शुक्रवार रात सफलतापूर्वक ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ पार किया |
| ईरान का रुख | ईरानी राजदूत मोहम्मद फताली ने भारत को ‘सुरक्षित मार्ग’ (Safe Passage) देने का संकेत दिया |
| भारत की स्थिति | भारतीय नौसेना के युद्धपोत हाई अलर्ट पर; टैंकरों की आवाजाही पर कड़ी नजर |
| संकट का असर | भारत में LPG की कमी के बीच इन टैंकरों का पहुँचना बड़ी राहत; 55,000 टन गैस की खेप |

















