फरवरी में महंगाई ने बढ़ाई चिंता — खुदरा महंगाई दर 3.21% पर पहुंची, जनवरी के 2.74% से अधिक
नई दिल्ली। भारत में खुदरा महंगाई के ताजा आंकड़े सामने आए हैं जो आम आदमी की जेब पर बढ़ते दबाव की तस्वीर पेश करते हैं। नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI सीरीज के अनुसार फरवरी 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 प्रतिशत पर पहुंच गई है। जनवरी 2026 में यह आंकड़ा 2.74 प्रतिशत था। हालांकि यह दर अभी भी RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है, लेकिन बढ़ोतरी की यह रफ्तार नीति निर्माताओं के लिए सोचने पर मजबूर करती है।
क्यों बढ़ी महंगाई दर
विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी में खुदरा महंगाई बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल, सब्जियों और दालों के दाम बढ़ना तथा ईंधन की कीमतों में अस्थिरता इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके अलावा मध्य पूर्व में जारी संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी घरेलू महंगाई पर दिखने लगा है।
नई CPI सीरीज क्या है
सरकार ने हाल ही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला जारी की है जो बदलती उपभोग आदतों और आर्थिक वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से दर्शाती है। नई CPI सीरीज में खाद्य, ईंधन, आवास और सेवाओं के भार को अद्यतन किया गया है जिससे महंगाई का आकलन अधिक सटीक हो सका है।
RBI की नीति पर असर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में ब्याज दरों में कटौती की थी जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना था। हालांकि महंगाई में यह बढ़ोतरी RBI के अगले मौद्रिक नीति निर्णय को प्रभावित कर सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई दर इसी तरह बढ़ती रही तो केंद्रीय बैंक दर कटौती की गति धीमी कर सकता है।
आम आदमी पर असर
महंगाई दर में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम परिवारों की रसोई और दैनिक बजट को प्रभावित करती है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर परिवहन तक हर चीज महंगी होती दिख रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करके और जमाखोरी पर लगाम लगाकर महंगाई को नियंत्रित रखना होगा।

















