मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में घर या जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। शहर के कुछ चुनिंदा इलाकों में संपत्ति की कलेक्टर गाइडलाइन दरें आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो न केवल जमीन की खरीद-बिक्री महंगी होगी, बल्कि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क में भी सीधा इजाफा होगा।
सर्वे का काम पूरा, रिपोर्ट तैयार
महानिदेशक पंजीयन मुख्यालय भोपाल ने जबलपुर समेत प्रदेश के सभी जिला पंजीयन कार्यालयों को नई कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करने के लिए निर्देश दे दिए हैं। इसके बाद जबलपुर में तीनों उप जिला मूल्यांकन समितियों — जबलपुर, सिहोरा और पाटन — ने अपने-अपने क्षेत्रों में जमीनों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की है। इस सर्वे में यह जांचा गया है कि किन इलाकों में मौजूदा गाइडलाइन दर और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर है।
किन इलाकों में होगा सबसे ज्यादा असर
सूत्रों के मुताबिक जबलपुर के उन इलाकों में सबसे अधिक दर वृद्धि का प्रस्ताव रखा जाएगा, जहाँ पिछले एक-दो वर्षों में रजिस्ट्री कलेक्टर गाइडलाइन से कहीं अधिक कीमतों पर हुई है। विजय नगर, नापियर टाउन, ग्वारीघाट रोड और अदर्श नगर जैसे विकसित व व्यावसायिक क्षेत्रों में दरें बढ़ने की सबसे अधिक संभावना है।
क्या होता है कलेक्टर गाइडलाइन रेट?
कलेक्टर गाइडलाइन रेट वह न्यूनतम सरकारी दर होती है, जिसके आधार पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री होती है और उस पर स्टांप ड्यूटी व पंजीयन शुल्क की गणना की जाती है। यदि कोई संपत्ति इस दर से कम में खरीदी-बेची जाती है, तो भी सरकार गाइडलाइन रेट के आधार पर ही शुल्क वसूल करती है। इसीलिए इसे बढ़ाने का सीधा असर आम खरीदार की जेब पर पड़ता है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गाइडलाइन दर 15 प्रतिशत बढ़ती है, तो 50 लाख रुपये की संपत्ति पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क में 30,000 से 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। पहली बार घर खरीदने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह झटका बड़ा साबित हो सकता है। वहीं कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह बदलाव बाजार में पारदर्शिता लाएगा और कम दाम दिखाकर की जाने वाली रजिस्ट्री पर रोक लगेगी।
पूरे प्रदेश में बदलाव की बयार
गौरतलब है कि केवल जबलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई कलेक्टर गाइडलाइन तैयार की जा रही है। भोपाल में तो 20 से 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के प्रस्ताव सामने आ चुके हैं। राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव संपत्ति बाजार के वास्तविक मूल्य के अनुरूप गाइडलाइन को अपडेट करने के लिए जरूरी है।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड देगा अंतिम मंजूरी
जबलपुर की उप जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट अब जिला मूल्यांकन समिति के सामने रखी जाएगी। इसके बाद इसे भोपाल स्थित केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास भेजा जाएगा, जहाँ अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू होंगी। हालांकि नागरिकों को अभी भी अपनी आपत्तियां पोर्टल पर दर्ज कराने का अवसर है।
क्या करें जमीन खरीदने वाले?
जानकारों की सलाह है कि जो लोग नई गाइडलाइन लागू होने से पहले अपनी संपत्ति रजिस्टर कराना चाहते हैं, वे जल्द से जल्द कदम उठाएं। साथ ही पंजीयन विभाग की वेबसाइट या जिला पंजीयन कार्यालय से अपने क्षेत्र की मौजूदा और प्रस्तावित गाइडलाइन दरें जरूर जांचें।

















