मुंबई, महाराष्ट्र। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर एक बड़ा संकट मंडराने लगा है। मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उठे विवाद के बीच मुंबई में रसोई गैस यानी LPG की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि शहर के होटल और रेस्तरां संचालकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द इस समस्या का हल नहीं निकला तो आने वाले कुछ ही दिनों में वे अपने प्रतिष्ठान बंद करने पर मजबूर हो जाएंगे।
कहां से शुरू हुआ यह संकट?
मुंबई में LPG संकट की जड़ें मध्यपूर्व के भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे विवाद के कारण समुद्री तेल और गैस की आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है। भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्यपूर्व के देशों से आयात करता है, और यह आपूर्ति मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती है। इस मार्ग पर बढ़ते तनाव के कारण आयात प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर मुंबई सहित देशभर के शहरों पर पड़ रहा है।
होटल और रेस्तरां संचालकों की परेशानी
मुंबई के होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में LPG की आपूर्ति में भारी कमी आई है। व्यावसायिक सिलेंडर की उपलब्धता पहले के मुकाबले काफी घट गई है और जो मिल भी रहे हैं, उनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। होटल व्यवसायियों के संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बिना गैस के खाना पकाना संभव नहीं है और यदि आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो उनके पास रेस्तरां बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
छोटे रेस्तरां पर सबसे बड़ा खतरा
इस संकट का सबसे अधिक असर मुंबई के छोटे और मझोले रेस्तरां तथा ढाबों पर पड़ रहा है। बड़े होटल श्रृंखलाएं तो किसी तरह वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती हैं, लेकिन छोटे व्यवसायी इस मार नहीं झेल पा रहे। डब्बावाले, छोटे भोजनालय और सड़क किनारे के ढाबे चलाने वाले लोग सबसे अधिक संकट में हैं। इनमें से कई तो पहले ही अपना काम आधा कर चुके हैं।
आम जनता पर क्या होगा असर?
होटल और रेस्तरां बंद होने की स्थिति में मुंबई की करोड़ों की आबादी को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मुंबई में लाखों ऐसे लोग हैं जो रोजाना बाहर खाने पर निर्भर हैं, जिनमें कामकाजी वर्ग, प्रवासी मजदूर और अकेले रहने वाले युवा शामिल हैं। इनके लिए होटल-रेस्तरां का बंद होना सीधे उनकी दैनिक जरूरतों पर असर डालेगा। इसके अलावा घरेलू LPG सिलेंडर की किल्लत भी बढ़ सकती है जिससे आम परिवारों की रसोई भी प्रभावित हो सकती है।
LPG की कीमतों में उछाल की आशंका
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यपूर्व में तनाव जारी रहा तो आने वाले हफ्तों में LPG की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रही मुंबई की जनता के लिए यह एक और बड़ा झटका होगा। व्यापारिक संगठनों ने मांग की है कि सरकार वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश करे और बफर स्टॉक का उपयोग करके बाजार में स्थिरता लाए।
सरकार की क्या है तैयारी?
केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर इस संकट से निपटने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की समीक्षा शुरू कर दी है। सरकारी तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में LPG आपूर्ति सुनिश्चित करें। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यपूर्व तनाव जल्दी न सुलझा तो ये उपाय नाकाफी साबित हो सकते हैं।
उद्योग जगत की मांग
होटल एसोसिएशन और रेस्तरां उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से कुछ तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि व्यावसायिक LPG सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाए, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस का विस्तार तेज किया जाए और आयात के नए रास्ते खोले जाएं। उद्योग का कहना है कि पहले ही कोरोना काल की मार झेल चुके छोटे रेस्तरां इस नए संकट को झेलने में सक्षम नहीं हैं।
मुंबई की अर्थव्यवस्था पर असर
मुंबई में होटल, रेस्तरां और खाद्य उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देता है। अगर यह संकट लंबा खिंचा तो न केवल व्यवसाय प्रभावित होंगे बल्कि हजारों लोगों की नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं। मुंबई की अर्थव्यवस्था में खाद्य और आतिथ्य उद्योग का बड़ा योगदान है और इस संकट का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर महसूस किया जा सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। मध्यपूर्व में तनाव कब कम होगा यह कोई नहीं जानता, लेकिन घरेलू मोर्चे पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। होटल और रेस्तरां संचालकों ने साफ कहा है कि उनके पास इंतजार करने का समय नहीं है। आने वाले कुछ दिन मुंबई के खाद्य उद्योग के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे।

















