भोपाल, मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने एक अहम आदेश जारी करते हुए प्रदेश के पेंशनरों से वसूली करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के सामने आने के बाद से प्रदेशभर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। हजारों पेंशनरों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कुछ पेंशनरों को तय सीमा से अधिक पेंशन राशि का भुगतान किया गया था। विभाग ने इसे अतिरिक्त भुगतान मानते हुए संबंधित पेंशनरों से उस रकम की वसूली का निर्णय लिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह वसूली नियमानुसार की जाएगी और इसकी प्रक्रिया संबंधित जिलों के कोषालय कार्यालयों के माध्यम से पूरी की जाएगी।
किन पेंशनरों पर होगा असर?
सूत्रों के मुताबिक यह आदेश मुख्य रूप से उन सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा —
- जिन्हें सातवें वेतनमान के पुनरीक्षण के दौरान गलत गणना के चलते अधिक पेंशन दी गई
- जिनके पेंशन प्रकरणों में दस्तावेजी त्रुटि पाई गई
- जिन्हें किसी तकनीकी कारण से दोहरा भुगतान हुआ
पेंशनरों में रोष, संगठन हुए सक्रिय
इस आदेश के जारी होते ही प्रदेश के विभिन्न पेंशनर संगठन सक्रिय हो गए हैं। कई संगठनों ने इसे बुजुर्ग और असहाय सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया है। पेंशनर नेताओं का कहना है कि यदि भुगतान में गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी विभाग की है, न कि पेंशनर की। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
वित्त विभाग का पक्ष
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सरकारी नियमों और वित्तीय अनुशासन के तहत उठाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वसूली एकमुश्त नहीं, बल्कि किश्तों में की जाएगी ताकि पेंशनरों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में वसूली की राशि अधिक है, उनमें पेंशनर आवेदन देकर राहत की मांग कर सकते हैं।
विपक्ष ने साधा निशाना
प्रदेश के विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि जो लोग अपनी पूरी जिंदगी सरकारी सेवा में लगा चुके हैं, उनसे इस तरह की वसूली न केवल अमानवीय है बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता को भी उजागर करती है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस आदेश की समीक्षा करे और पेंशनरों को राहत दे।
आगे क्या होगा?
वित्त विभाग के इस आदेश को लेकर आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। मामला अब राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है।

















