मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपना निशाना बनाते हुए उनसे एक लाख रुपये की ठगी कर ली। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि साइबर अपराधी किस तरह बुजुर्गों और तकनीक से कम परिचित लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।
कैसे हुई ठगी?
जानकारी के अनुसार, ठगों ने बुजुर्ग व्यक्ति को फोन कर खुद को सरकारी अधिकारी या पुलिस अधिकारी बताया। उन्हें यह कहकर डराया गया कि उनके नाम या आधार कार्ड का इस्तेमाल किसी संदिग्ध और अवैध गतिविधि में हुआ है। इसके बाद ठगों ने उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाया और कहा कि यदि तुरंत रकम जमा नहीं की तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर और घबराहट में आकर बुजुर्ग ने बिना किसी को बताए एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।
ठगी का एहसास होने पर दर्ज कराई शिकायत
रकम ट्रांसफर होने के बाद जब बुजुर्ग ने परिजनों को इस बारे में बताया, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं। इसके बाद परिवार ने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दी और स्थानीय साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर ट्रांजेक्शन की जाँच शुरू कर दी है।
पुलिस जाँच जारी
साइबर क्राइम पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि ठगी में इस्तेमाल बैंक खाते और मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के गिरोह अक्सर अलग-अलग राज्यों से ऑपरेट करते हैं और फर्जी सिम कार्ड तथा बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस ने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया है कि जल्द से जल्द आरोपियों का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
क्या है डिजिटल अरेस्ट का खेल?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका है जिसमें ठग खुद को CBI, ED, नारकोटिक्स विभाग या पुलिस का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को घंटों तक मानसिक दबाव में रखते हैं। उन्हें कहीं जाने या किसी से बात करने से रोका जाता है और डर दिखाकर रकम ऐंठ ली जाती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया होती ही नहीं है।
बुजुर्ग सबसे आसान निशाना
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग जानबूझकर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं क्योंकि वे डिजिटल तकनीक से कम परिचित होते हैं और आसानी से भयभीत हो जाते हैं। सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से इतना कमजोर कर दिया जाता है कि वे बिना सोचे-समझे रकम ट्रांसफर कर देते हैं। परिवार के अन्य सदस्यों को चाहिए कि वे घर के बुजुर्गों को इस तरह की ठगी के बारे में जागरूक करें।
साइबर ठगी से बचने के उपाय
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक खाते की जानकारी, OTP या रुपये साझा न करें। सरकारी एजेंसियाँ कभी भी फोन पर डराकर पैसे नहीं माँगती। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक रहती है।

















