मध्य प्रदेश बजट 2026-27 पर चर्चा करते हुए आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ मनीष जोशी ने सरकार द्वारा लिए जा रहे ‘कर्ज’ और किए जा रहे ‘निवेश’ के बीच के संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण विश्लेषण साझा किया है।
मनीष जोशी के अनुसार, बजट को केवल कर्ज के आंकड़ों से देखना अधूरा होगा; इसकी असलियत इस बात में छिपी है कि वह पैसा कहाँ इस्तेमाल हो रहा है। उनके विश्लेषण के मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं:
| मुख्य बिंदु | विशेषज्ञ की राय (Expert Opinion) |
| कर्ज की स्थिति | प्राथमिक रूप से कर्ज का आंकड़ा (लगभग ₹4 लाख करोड़ से अधिक) डरावना लग सकता है, लेकिन यह विकास की प्रक्रिया का हिस्सा है। |
| निवेश का नजरिया | यदि सरकार कर्ज लेकर ‘कैपेसिटी बिल्डिंग’ (क्षमता निर्माण) और ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर खर्च कर रही है, तो इसे कर्ज नहीं बल्कि भविष्य का निवेश माना जाना चाहिए। |
| फाइनेंशियल लीवरेजिंग | उन्होंने इसे ‘फाइनेंशियल लीवरेजिंग’ का कॉन्सेप्ट बताया, जहाँ कम लागत पर उधार लेकर ऐसी संपत्तियां बनाई जाती हैं जो भविष्य में जीडीपी और रोजगार बढ़ाती हैं। |
| कृषि क्षेत्र में निवेश | बजट में कृषि के लिए बड़ा प्रावधान किसानों की आय बढ़ाने और राज्य की जीडीपी में कृषि के योगदान को ‘वैल्यू एडिशन’ के जरिए मजबूत करने में मदद करेगा। |
विशेषज्ञ की राय के 3 बड़े तर्क
- जीडीपी ग्रोथ: मनीष जोशी का मानना है कि कर्ज लेकर किया गया निवेश यदि राज्य की जीडीपी ग्रोथ को 7-8% से ऊपर रखता है, तो वह कर्ज “अच्छा कर्ज” (Good Debt) कहलाता है।
- रोजगार सृजन: बजट में औद्योगिक पार्कों और आईटी निवेश पर जो जोर दिया गया है, वह भविष्य में कर राजस्व (Tax Revenue) बढ़ाएगा, जिससे कर्ज उतारना आसान होगा।
- भारत सरकार का अनुसरण: उन्होंने उल्लेख किया कि जिस तरह केंद्र सरकार पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर ध्यान दे रही है, मध्य प्रदेश सरकार ने भी उसी ‘फ्यूचरिस्टिक प्लान’ को अपनाया है।
बजट पर विशेषज्ञ टिप्पणी का सारांश
“कर्ज लेना चिंता की बात तब होती है जब वह केवल वेतन और भत्तों (राजस्व व्यय) में खर्च हो। लेकिन यदि पैसा सड़कों, सिंचाई, और उद्योगों में जा रहा है, तो यह मध्य प्रदेश को ‘विकसित राज्य’ बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है।” — मनीष जोशी















