विजय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ‘जननायकन’ (Jan Nayakan) उनकी आखिरी फिल्म होगी, जो 2026 की शुरुआत में रिलीज हो सकती है। 33 साल के शानदार फिल्मी करियर को दांव पर लगाकर राजनीति में उतरना एक ‘बड़ा रिस्क’ माना जा रहा है।
विवाद जिसने बदली हवा (करूर भगदड़ कांड)
विजय की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत में ही एक बड़ी त्रासदी ने उन्हें विवादों में घेर लिया:
- घटना: सितंबर 2025 में तमिलनाडु के करूर (Karur) में विजय की रैली के दौरान भीषण भगदड़ मची।
- दुखद परिणाम: इस हादसे में लगभग 41 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हुए।
- विवाद: मद्रास हाईकोर्ट ने इस घटना पर विजय और उनकी पार्टी को कड़ी फटकार लगाई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि विजय भीड़ को संभालने में विफल रहे और हादसे के बाद ‘गायब’ हो गए। इस घटना ने उनकी ‘रक्षक’ वाली फिल्मी छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है।
विजय के लिए यह समय ‘करो या मरो’ (Do or Die) जैसा है। उन्होंने अपने करियर के चरम (Peak) पर अभिनय छोड़ने का फैसला किया है, जहाँ वे प्रति फिल्म 200-250 करोड़ रुपये की फीस ले रहे थे।
करियर और राजनीति के बीच फंसे विजय:
- संन्यास का जोखिम: यदि 2026 के चुनावों में TVK को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, तो विजय के पास वापस फिल्मों में आने का रास्ता कठिन होगा। दर्शक अक्सर उन सितारों को स्वीकार नहीं करते जो एक बार राजनीति में पूरी तरह डूब चुके हों।
- विचारधारा का टकराव: भाजपा और डीएमके (DMK) दोनों ही विजय पर निशाना साध रहे हैं। भाजपा उन्हें ‘ईसाई समर्थक’ बताकर ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है, जबकि डीएमके उन्हें ‘वोट काटने वाला’ करार दे रही है। इन आरोपों का असर उनकी फिल्मों की पैन-इंडिया अपील पर भी पड़ा है।
- सफलता का दबाव: रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गजों ने भी राजनीति में हाथ आजमाया, लेकिन वे एमजीआर (MGR) या जयललिता जैसा जादू नहीं दोहरा पाए। विजय के लिए भी चुनौती यही है कि क्या उनकी फैन फॉलोइंग वोटों में बदल पाएगी।
निष्कर्ष: विजय की ‘एक राजनैतिक गलती’ (जैसे रैलियों में सुरक्षा चूक या विवादित बयान) न केवल उन्हें चुनावी नुकसान पहुँचा सकती है, बल्कि उनके 33 साल के बेदाग फिल्मी सफर पर भी सवाल खड़े कर सकती है।















