भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सोमवार को एक तीखी और तथ्यों से भरपूर पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई गंभीर और सीधे सवाल दागे। उन्होंने इस व्यापार समझौते को किसानों, युवाओं, देश की ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए इसे एक “Compromised प्रधानमंत्री” द्वारा देश पर थोपा गया सौदा करार दिया।
30 मिनट की कॉल में देश का सौदा — कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल
श्रीनेत ने सबसे पहले वह सवाल उठाया जो इस पूरे विवाद की जड़ है। उन्होंने कहा कि 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की Reciprocal Tariffs नीति पर रोक लगा दी थी। इस एक फैसले ने भारत के लिए बातचीत की पूरी जमीन बदल दी थी और बेहतर शर्तों पर डील की संभावना खुल गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का इंतजार तक नहीं किया और महज 30 मिनट की एक फोन कॉल के बाद ऐसे व्यापार समझौते पर सहमति दे दी जो भारत के हितों को सीधे नुकसान पहुँचाता है। उन्होंने पूछा कि आखिर इतनी असामान्य जल्दबाजी क्यों थी और यह जल्दी किसके फायदे के लिए थी?
18% बनाम 10% — वह आंकड़ा जो सब कुछ कह देता है
इस पत्रकार वार्ता में सुप्रिया श्रीनेत ने एक ऐसा आंकड़ा सामने रखा जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत पर अधिकतम 10% वैश्विक टैरिफ ही लागू होता। लेकिन जो ट्रेड डील हुई उसमें भारतीय उत्पादों पर 18% टैरिफ स्वीकार कर लिया गया — जो पहले के 3% से तुलना करें तो छह गुना अधिक है। श्रीनेत ने तंज कसा कि सरकार इसी को उपलब्धि बताकर जश्न मना रही है, जबकि असल में यह देश को गुमराह करने की कोशिश है।
किसान पहले से संकट में, अब अमेरिकी बाजार का दबाव भी
श्रीनेत ने इस डील के किसान विरोधी पहलू पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने एक बहुत महत्वपूर्ण तुलना सामने रखी — अमेरिका में एक किसान के पास औसतन 170 हेक्टेयर जमीन होती है, जबकि भारत में औसत जोत मात्र 1 से 1.5 हेक्टेयर है। इस पर अमेरिकी किसानों को भारी सरकारी सब्सिडी भी मिलती है। ऐसे में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलना वैसा ही होगा जैसे एक छोटी नाव को समुद्री जहाज से प्रतिस्पर्धा करने के लिए छोड़ देना। श्रीनेत ने सवाल किया कि जब भारतीय किसान पहले से ही लागत वृद्धि, मौसमी अनिश्चितता और बाजार के संकट से जूझ रहे हैं, तो उन पर यह नया बोझ क्यों डाला जा रहा है?
ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता पर भी खतरा
कांग्रेस नेत्री ने यह भी बताया कि यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद करने की शर्त स्वीकार की है, जिससे आने वाले दिनों में भारत को महंगे तेल आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इसके अलावा डेटा संप्रभुता पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश का संवेदनशील डेटा अमेरिका को सौंपने जैसी शर्तें भारत की डिजिटल आजादी के लिए गंभीर खतरा हैं। साथ ही इस डील में भारत ने पाँच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के सामान के आयात और अमेरिकी उत्पादों पर लगभग शून्य टैरिफ जैसी शर्तें भी मानी हैं।
युवा कांग्रेस के प्रदर्शन को बताया देश की आवाज
श्रीनेत ने युवा कांग्रेस के इस डील के खिलाफ चल रहे आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा डरने वाले नहीं हैं और वे देश की असली अंतरात्मा की आवाज हैं। जो लोग इस प्रदर्शन पर आपत्ति जता रहे हैं, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि किसानों की बर्बादी के खिलाफ बोलना आखिर गलत कैसे है।
मीडिया पर भी साधा निशाना
पत्रकार वार्ता में श्रीनेत ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष को धमकी देने जैसी गंभीर घटनाओं पर चुप्पी, किसान विरोधी नीतियों पर ब्लैकआउट और विदेश नीति की नाकामियों को छुपाना — ये सब मिलकर मीडिया की साख को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की छवि आलोचना से नहीं बल्कि आत्मसमर्पण से खराब होती है।
24 फरवरी को किसान महापंचायत — राहुल और खड़गे होंगे मौजूद
पत्रकार वार्ता के अंत में श्रीनेत ने बड़ी घोषणा की कि 24 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाली किसान सम्मेलन महापंचायत में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस ट्रेड डील के खिलाफ किसानों और युवाओं की आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक इस जनविरोधी समझौते का पुरजोर विरोध जारी रखेगी।















