मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए खनन माफियाओं ने एक बार फिर खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध उत्खनन रोकने गई पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम पर माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया।
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | श्योपुर (चंबल नदी तटीय इलाका) |
| विपक्षी दल | अवैध रेत माफिया और उनके सशस्त्र समर्थक |
| कार्रवाई | वन विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त दबिश |
| नतीजा | अधिकारियों पर पथराव और वाहन क्षतिग्रस्त |
श्योपुर जिले के विजयपुर और वीरपुर थाना क्षेत्रों में चंबल नदी से रेत का अवैध उत्खनन लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। आज तड़के जब सूचना के आधार पर पुलिस और वन विभाग की टीम ने घेराबंदी की, तो माफियाओं ने संगठित होकर टीम पर पथराव शुरू कर दिया।
माफियाओं की कार्यप्रणाली: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही अधिकारियों ने रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त करने की कोशिश की, आसपास के गांवों से दर्जनों की संख्या में लोग लाठी-डंडे और हथियार लेकर आ गए। माफियाओं ने न केवल टीम को पीछे हटने पर मजबूर किया, बल्कि जब्त की गई ट्रॉलियों को भी छुड़ा ले गए। हमले में सरकारी वाहनों के कांच टूट गए हैं और कुछ कर्मचारियों को मामूली चोटें भी आई हैं।
“खनन माफिया अब केवल चोरी नहीं कर रहे, बल्कि वे खुलेआम सत्ता और प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं। चंबल के घड़ियाल अभयारण्य (Sanctuary) की पारिस्थितिकी को इस अवैध कार्य से अपूरणीय क्षति हो रही है।”
प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि कई बार कार्रवाई के बावजूद माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध धंधे में सफेदपोशों और कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। फिलहाल, श्योपुर एसपी (SP) ने भारी पुलिस बल मौके पर भेजा है और हमलावरों को चिन्हित कर उनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और हत्या के प्रयास जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया जा रहा है। इलाके में तनाव को देखते हुए सशस्त्र गश्त बढ़ा दी गई है।


















