धमतरी जिले के गरियाबंद मार्ग पर स्थित सुप्रसिद्ध भूतेश्वरनाथ मंदिर (रोहरा) में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी रोहरा परिवार द्वारा आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
यहाँ इस धार्मिक आयोजन का विस्तृत विवरण दिया गया है:
भूतेश्वरनाथ मंदिर: सेवा और समर्पण की झलक
विश्व के सबसे ऊंचे प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में विख्यात भूतेश्वरनाथ महादेव के दर्शन हेतु उमड़ी भीड़ के लिए यह भंडारा बड़ी राहत और सुविधा का केंद्र बना।
| मद | विवरण (Details) |
| आयोजक | रोहरा परिवार (धमतरी/गरियाबंद) |
| स्थान | भूतेश्वरनाथ मंदिर परिसर, गरियाबंद |
| अवधि | सुबह 9:00 बजे से देर शाम तक |
| प्रसाद वितरण | खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी और हलवा |
| कुल लाभार्थी | 10,000 से अधिक श्रद्धालु |
‘नर सेवा ही नारायण सेवा’: रोहरा परिवार की पहल (250-300 शब्द)
महाशिवरात्रि के अवसर पर जब पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज रहा था, तब रोहरा परिवार के सदस्यों ने अपनी सेवा भावना से श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
भंडारे की मुख्य बातें:
- सुबह से ही कतारें: मंदिर के पट खुलते ही दर्शनार्थियों का तांता लग गया था। लंबी कतारों में लगे भक्तों की थकान मिटाने के लिए रोहरा परिवार द्वारा सुबह से ही अल्पाहार और शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई।
- दिन भर चला भंडारा: दोपहर 12 बजे से मुख्य भंडारा शुरू हुआ, जो शाम ढलने तक अनवरत चलता रहा। स्वयंसेवकों और परिवार के सदस्यों ने स्वयं आगे आकर श्रद्धालुओं को आदरपूर्वक भोजन परोसा।
- स्वच्छता का ध्यान: आयोजन के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। उपयोग किए गए पत्तलों और कचरे के निपटान के लिए डस्टबिन और सफाई कर्मियों की विशेष टीम तैनात रही, ताकि मंदिर परिसर की पवित्रता बनी रहे।
- दूर-दराज के भक्तों को सुविधा: भूतेश्वरनाथ महादेव के दर्शन के लिए कई श्रद्धालु पैदल और दूर-दराज के गांवों से पहुंचे थे। उनके लिए यह भंडारा भोजन के साथ-साथ विश्राम का भी एक प्रमुख स्थान साबित हुआ।
श्रद्धालु का अनुभव: “महादेव के दर्शन के बाद रोहरा परिवार द्वारा दी गई यह सेवा सराहनीय है। घंटों लाइन में लगने के बाद प्रसाद पाकर मन तृप्त हो गया।
सुरक्षा और व्यवस्था
हजारों की भीड़ को देखते हुए आयोजन स्थल पर स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला। रोहरा परिवार के सदस्यों ने सुनिश्चित किया कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्रसाद ग्रहण करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
















