निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर भारी-भरकम वसूली और लापरवाही की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में ग्रेटर नोएडा के महानंदन हॉस्पिटल और अन्य निजी चिकित्सा केंद्रों के खिलाफ परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया है।
परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर न केवल लाखों रुपये वसूले, बल्कि मरीज की जान जाने के बाद भी बिल के नाम पर शव बंधक बनाने जैसी अमानवीय हरकतें कीं।
प्रमुख घटनाएं और परिजनों के आरोप
- महानंदन हॉस्पिटल (ग्रेटर नोएडा): जयदेव सिंह (फिरोजाबाद) के परिजनों ने आरोप लगाया कि ब्रेन हैमरेज के इलाज के नाम पर उनसे ₹30 लाख वसूले गए। जमीन बेचकर और कर्ज लेकर पैसे दिए गए, लेकिन मरीज को नहीं बचाया जा सका। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद भी ₹3 लाख के बकाया के लिए शव देने से मना कर दिया गया।
- तिलक नगर (दिल्ली): 22 फरवरी 2026 को तिलक नगर थाने के बाहर एक 25 वर्षीय युवक के परिजनों ने जोरदार हंगामा किया। परिजनों का कहना था कि अस्पताल की लापरवाही और समय पर इलाज न मिलना ‘हत्या’ के समान है।
- नेदुमंगद (केरल): फरवरी 2026 में ही एक नवजात की मौत के बाद अस्पताल में भारी बवाल हुआ। परिजनों ने डॉक्टर पर ₹25,000 की रिश्वत लेने और सी-सेक्शन (C-section) में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद डॉक्टर को निलंबित करना पड़ा।
क्या है परिजनों का “लूट” वाला दावा?
- अनावश्यक सर्जरी: परिजनों का आरोप है कि प्राइवेट अस्पताल मुनाफा कमाने के लिए बार-बार ऑपरेशन (सर्जरी) करते हैं।
- दवाइयों का खेल: सुबह-शाम ₹20,000-25,000 की दवाइयां मंगवाना लेकिन मरीज की हालत में सुधार न होना।
- शव पर सौदेबाजी: मौत के बाद भी आईसीयू (ICU) का खर्च जोड़ना और बिल जमा न होने तक शव न सौंपना।
कानूनी प्रावधान और आपकी सुरक्षा
यदि आपके साथ ऐसी स्थिति आती है, तो आप इन रास्तों को अपना सकते हैं:
- उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum): चिकित्सा लापरवाही (Medical Negligence) के लिए हर्जाना मांगा जा सकता है।
- अस्पताल संरक्षण अधिनियम: कई राज्यों में अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए सख्त नियम हैं।
- पुलिस शिकायत: यदि इलाज के नाम पर धोखाधड़ी या जानबूझकर लापरवाही हुई है, तो बीएनएस (BNS) की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
















