राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में जनजातीय परंपराओं, कला और समृद्ध संस्कृति पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए जनजातीय कलाकारों से संवाद किया और उनके कौशल की सराहना की। यह प्रदर्शनी जनजातीय समुदायों के गौरवशाली इतिहास और उनकी अद्वितीय विरासत को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित की गई थी।
यहाँ इस आयोजन की प्रमुख झलकियाँ और मुख्य आकर्षण दिए गए हैं:
प्रदर्शनी की मुख्य विशेषताएं
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य जनजातीय ज्ञान, कला और उनकी जीवनशैली को मुख्यधारा से जोड़ना है।
| प्रमुख क्षेत्र | प्रदर्शनी का विवरण (Highlights) |
| पारंपरिक कला | गोंड, पिथौरा, सोरा और वारली पेंटिंग्स का सजीव प्रदर्शन। |
| हस्तशिल्प | ढोकरा धातु शिल्प, बांस के उत्पाद और पारंपरिक हथकरघा वस्त्र। |
| आयुर्वेद एवं औषधि | जनजातीय समुदायों द्वारा उपयोग की जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्रदर्शन। |
| डिजिटल आर्काइव | जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को दर्शाती डिजिटल दीर्घा। |
प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान राष्ट्रपति ने स्वयं कुछ पारंपरिक शिल्पों को करीब से देखा और कलाकारों के साथ समय बिताया।
प्रमुख आकर्षण:
- कलात्मक विविधता: प्रदर्शनी में देश के उत्तर-पूर्व से लेकर मध्य भारत और दक्षिण के जनजातीय अंचलों की कलाकृतियों को सजाया गया था।
- स्वतंत्रता सेनानियों को नमन: प्रदर्शनी के एक विशेष खंड में भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील और रानी दुर्गावती जैसे जनजातीय नायकों के योगदान को चित्रों और कहानियों के माध्यम से दर्शाया गया। राष्ट्रपति ने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया।
- सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास): राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय संस्कृति प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने का सबसे बड़ा उदाहरण है। उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली सामग्री पूरी तरह से प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) है।
- महिला सशक्तिकरण: प्रदर्शनी में कई महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया। राष्ट्रपति ने महिला उद्यमियों के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों की विशेष प्रशंसा की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा:
“हमारी जनजातीय परंपराएं भारत की आत्मा का हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित करना और विश्व स्तर पर पहचान दिलाना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।















