पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष और युद्ध जैसे हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 23 मार्च 2026 को लोकसभा में देश के नाम एक बेहद महत्वपूर्ण संबोधन दिया। पीएम ने देशवासियों से इस वैश्विक संकट के लंबे समय तक चलने की आशंका जताते हुए ‘तैयार और एकजुट’ रहने की अपील की है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को संसद में देश को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) में चल रहा संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके वैश्विक परिणाम लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं। पीएम ने देशवासियों का आह्वान किया कि जिस तरह भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान एकजुट होकर जीत हासिल की थी, वैसी ही मजबूती और धैर्य दिखाने का समय अब फिर से आ गया है।
पीएम के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
- लंबे समय तक रहेगी मुश्किल: पीएम ने आगाह किया कि युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक हालात जल्द ठीक होने वाले नहीं हैं। व्यापारिक मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) में बाधा और ऊर्जा संकट का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
- अफवाहों से बचें: संकट के समय कुछ तत्व समाज में झूठ और डर फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। पीएम ने नागरिकों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर विश्वास करने को कहा।
- कालाबाजारी पर सख्ती: प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि युद्ध की आड़ में जरूरी सामानों की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर: देश की तटीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि बाहरी परिस्थितियों का फायदा उठाकर कोई आंतरिक अस्थिरता न फैला सके।
- भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि: खाड़ी देशों में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। पीएम ने बताया कि अब तक 3.75 लाख से ज्यादा लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं।
“संवाद ही एकमात्र रास्ता” प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत हमेशा शांति और मानवता का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा, “युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है; बातचीत और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) ही शांति का एकमात्र रास्ता है।
















