केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को पुणे में आयोजित IFGE कंप्रेस्ड बायोगैस कॉन्क्लेव में एक बड़ा और बेबाक बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में हर साल ₹22 लाख करोड़ के जीवाश्म ईंधन का आयात होता है और इसी कारण पेट्रोलियम लॉबी हरित ईंधन की दिशा में भारत के प्रयासों को रोकने की पूरी ताकत से कोशिश कर रही है।
गडकरी ने कहा कि इस लॉबी का उनके खिलाफ सीधा अभियान चल रहा है क्योंकि वे देश में इथेनॉल, बायो-सीएनजी और हरित हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी ग्रीन फ्यूल इकोनॉमी में उनका खुद का कोई आर्थिक स्वार्थ नहीं है, फिर भी यह लॉबी उनके पीछे पड़ी हुई है।
मंत्री ने कहा कि हरित ईंधन अपनाने से ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, प्रदूषण घटेगा और जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च होने वाली भारी राशि देश की अर्थव्यवस्था में लगेगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट यह बताता है कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा कितनी जरूरी है।
गडकरी ने जोश के साथ कहा — “हार से आदमी खत्म नहीं होता, हार मान लेने से होता है। हम डरेंगे नहीं, लड़ेंगे और जीतेंगे।”
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की बिक्री अनिवार्य कर दी है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और आयात बिल में कमी आएगी।
















