मध्य प्रदेश में अब पानी के बाद हवा भी ‘जहरीली’ हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने पर्यावरणविद् राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश की बिगड़ती आबोहवा पर गहरी चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि स्वच्छ हवा में सांस लेना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसका राज्य में खुला उल्लंघन हो रहा है।
वे 8 शहर जहाँ हवा हुई ‘जहरीली’ (Non-Attainment Cities)
NGT ने पाया कि प्रदेश के निम्नलिखित 8 शहर पिछले पांच वर्षों से लगातार राष्ट्रीय मानकों (NAAQS) को पूरा करने में विफल रहे हैं:
- भोपाल (राजधानी)
- इंदौर (व्यावसायिक राजधानी)
- ग्वालियर (सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार)
- जबलपुर
- उज्जैन
- सागर
- देवास
- सिंगरौली (औद्योगिक हब)
याचिका में एक बेहद गंभीर आरोप डेटा हेरफेर (Data Manipulation) का लगाया गया है। आरोप है कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों के पास दिन में 10 से 15 बार पानी का छिड़काव करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि सेंसर के आसपास की धूल दब जाए और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़े कागजों पर ‘सामान्य’ दिखें। NGT ने इसे जनता की सेहत के साथ ‘धोखाधड़ी’ करार दिया है।
प्रदूषण के प्रमुख कारण और वर्तमान स्थिति:
- निर्माण कार्यों की धूल: भोपाल मेट्रो और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के चलते उड़ती धूल को रोकने के लिए ‘स्प्रिंकलर’ जैसे नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
- पराली का कहर: मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं पंजाब-हरियाणा से भी अधिक दर्ज की गई हैं। सीहोर, विदिशा और रायसेन में इस सीजन में 31 हजार से ज्यादा मामले सामने आए।
- दिल्ली जैसा स्मॉग: सर्दियों में भोपाल का AQI कई बार 300 से 330 के पार पहुँच रहा है, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।
अदालत का आदेश: NGT ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 6 हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। साथ ही, दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और एयर-शेड आधारित नीति लागू करने पर विचार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को तय की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले में नोडल एजेंसी बनाया गया है और एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है जो इन 8 शहरों में प्रदूषण कम करने के उपायों की समीक्षा करेगी।

















