मध्यप्रदेश के नीमच जिले में कमर्शियल एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार की कमर तोड़ दी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई होटल संचालक रोज का खाना बनाने तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने रविवार को कलेक्ट्रेट में एक आपात बैठक बुलाई।
कौन-कौन हुए बैठक में शामिल?
अतिरिक्त कलेक्टर बीएल कालेश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिले के होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान, कैटरिंग और मैरिज गार्डन संचालक मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि गैस नहीं मिलने से उनका कारोबार ठप होने की नौबत आ गई है। बड़े ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और रोजमर्रा की आमदनी पर सीधी चोट पड़ रही है।
क्यों हो रहा है यह संकट?
दरअसल, मध्यपूर्व में चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है, जिसके रास्ते भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा एलपीजी आयात करता था। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल गैस की आपूर्ति सीमित कर दी है। इसका सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं छोटे शहरों के व्यापारी।
प्रशासन की सलाह — घरेलू सिलेंडर बिल्कुल नहीं
बैठक में अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी व्यवसायी घरेलू एलपीजी सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल न करे। यह कानूनी अपराध है और पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। बदले में उन्हें लकड़ी के चूल्हे, कोयला भट्टी, डीजल बर्नर और इंडक्शन सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई।
व्यापारियों में गुस्सा और बेबसी
स्थानीय होटल संचालकों का कहना है कि यह संकट अचानक आया है और उनके पास वैकल्पिक व्यवस्था के लिए न तो समय है न पैसा। छोटे ढाबा मालिक तो पहले से ही मंदी झेल रहे हैं, ऊपर से यह गैस का टोटा उनकी रोजी-रोटी पर भारी पड़ रहा है। व्यापार मंडल ने सरकार से मांग की है कि होटल उद्योग को आवश्यक सेवा मानकर कमर्शियल गैस की आपूर्ति जल्द बहाल की जाए।

















