मध्य प्रदेश में फरवरी की शुरुआत के साथ ही मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव आया है। उत्तर भारत से आ रहे वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और हवाओं के बदले रुख ने प्रदेश के कई हिस्सों में मावठ और ओलावृष्टि की स्थिति बना दी है। मौसम विभाग (IMD) ने आज, 2 फरवरी 2026 को ग्वालियर-चंबल संभाग सहित प्रदेश के 25 जिलों में आंधी, बारिश और ओले गिरने का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मौसम की स्थिति: क्यों बदला मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से राजस्थान के ऊपर एक चक्रवाती घेरा बना है। इसके साथ ही अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य प्रदेश के मध्य और उत्तरी भागों में बादलों का डेरा है।
| घटना (Phenomenon) | प्रभावित क्षेत्र (Affected Areas) |
| भारी बारिश और ओले | ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, मुरैना, भिंड और श्योपुर कलां। |
| गरज-चमक के साथ बौछारें | भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के जिले। |
| घना कोहरा | छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और जबलपुर बेल्ट। |
| तापमान में गिरावट | बारिश के बाद दिन के पारे में 3°C से 5°C तक की गिरावट की संभावना। |
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसलों के लिए चिंता बढ़ा दी है।
मुख्य प्रभाव:
- सरसों और चना: इस समय सरसों की फसल पकने की कगार पर है। ओले गिरने से फलियां टूट सकती हैं, जिससे पैदावार में भारी नुकसान होने की आशंका है। चने की फसल में भी फूल झड़ने का डर है।
- गेहूं की फसल: जिन क्षेत्रों में केवल हल्की बारिश हो रही है, वहां गेहूं के लिए यह ‘अमृत’ समान है, लेकिन तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर फसलें आड़ी (Lodging) गिर सकती हैं।
- कृषि विभाग की सलाह: किसानों को सलाह दी गई है कि वे अभी फसलों में सिंचाई और उर्वरक का छिड़काव रोक दें। कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों या तिरपाल से ढक कर रखें। [Image showing local farmers covering their harvested crops with plastic sheets]
अगले 48 घंटे: मौसम विभाग का अनुमान है कि यह सिस्टम 4 फरवरी तक सक्रिय रहेगा, जिसके बाद उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण प्रदेश में एक बार फिर कड़ाके की ठंड का दौर शुरू होगा।


















