भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज सोमवार 23 फरवरी 2026 को छठवां दिन है और सदन की कार्यवाही से ज्यादा चर्चा इस वक्त एक नाम को लेकर है — हेमंत कटारे। भिंड जिले की अटेर सीट से कांग्रेस विधायक और अभी तक उप नेता प्रतिपक्ष रहे हेमंत कटारे ने खुद सोशल मीडिया पर एलान किया था कि वे सोमवार को पूरे दस्तावेज, पूरी तैयारी और पूरी ताकत के साथ सदन में मौजूद रहेंगे। अब जब वह दिन आ गया है तो पूरी कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजरें कटारे पर टिकी हैं कि आज वे अपने इस्तीफे को लेकर आखिरकार क्या कहते हैं।
पाँच दिनों में क्या-क्या हुआ?
यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त से शुरू हुआ जब गुरुवार 20 फरवरी को कटारे की शादी की सालगिरह थी। उस दिन वे अपने मामा के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए शताब्दी एक्सप्रेस से जाने वाले थे। लेकिन सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और सचेतक सोहन वाल्मीक लंच के लिए बाहर चले गए, जिसके कारण कटारे सदन नहीं छोड़ पाए और उनकी ट्रेन छूट गई। समन्वय की इस कमी ने उनके भीतर एक ऐसी नाराजगी भरी जो अगले ही दिन इस्तीफे के रूप में सामने आ गई।
शुक्रवार 20 फरवरी की शाम करीब चार बजे कटारे अचानक विधानसभा की कार्यवाही छोड़कर बाहर निकल गए और उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। जैसे-जैसे शाम ढली, यह खबर फैलती गई कि उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार — तीनों को भेजा।
इस्तीफे में क्या लिखा था?
कटारे ने अपने पत्र में परिवार और अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता को पर्याप्त समय न दे पाने को इस्तीफे की वजह बताई। उन्होंने लिखा कि पार्टी जिसे भी यह जिम्मेदारी सौंपना चाहे, वे उनका पूरा सहयोग करेंगे। इस्तीफे के अंत में उन्होंने जोड़ा कि कांग्रेस उनके स्वर्गीय पिता सत्यदेव कटारे की विरासत है और वे इससे किसी भी हाल में दूर नहीं जाएंगे।
24 घंटे के ‘सस्पेंस’ के बाद क्या हुआ?
पूरी रात और अगले दिन शनिवार को राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगते रहे। कुछ लोगों ने भाजपा में जाने की अटकलें लगाईं तो कुछ ने इसे कांग्रेस के भीतर गहरे मतभेद की शुरुआत माना। शनिवार को खुद कटारे ने सोशल मीडिया पर आकर यह साफ किया कि उन्होंने केवल पद से इस्तीफा दिया है, कांग्रेस पार्टी से नहीं। उन्होंने भाजपा पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को ज्यादा खुशफहमी पालने की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने हल्के लहजे में यह भी कहा कि कभी-कभी नेता भी इंसान होता है — यह जुमला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।
कांग्रेस के भीतर असली बात क्या है?
पर्दे के पीछे की बात यह है कि कटारे का यह इस्तीफा केवल ट्रेन छूटने की घटना की प्रतिक्रिया नहीं था — यह उस असंतोष का विस्फोट था जो पार्टी के भीतर तालमेल की कमी को लेकर काफी वक्त से सुलग रहा था। कटारे सदन में कांग्रेस के ब्राह्मण और सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करते थे और उनका यह अचानक कदम यह भी बताता है कि प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक समन्वय को लेकर अभी बहुत कुछ सुधारने की जरूरत है।
BJP का रुख क्या है?
पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने इस मौके का फायदा उठाते हुए तंज कसा कि केवल पद मिलना काफी नहीं होता, सम्मान और प्रोटोकॉल भी जरूरी होता है। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की आंतरिक अव्यवस्था और नेतृत्व की विफलता के रूप में प्रचारित करने की कोशिश की है।
एक और पेच — रेप केस की जाँच
इस पूरी कहानी में एक और परत भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2018 में एक मीडिया यूनिवर्सिटी की छात्रा से दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नए सिरे से हो रही जाँच अब अंतिम दौर में बताई जा रही है। इस मामले में कटारे का नाम है और जाँच के तेज होने के साथ-साथ उनकी राजनीतिक उठापटक का समय एक से अधिक व्याख्याओं के लिए जगह बनाता है।
आज सदन में क्या होगा?
आज छठवें दिन की कार्यवाही में सबकी नजर इस बात पर होगी कि कटारे सदन में आते हैं या नहीं, और अगर आते हैं तो उनका रुख क्या होता है। कांग्रेस नेतृत्व उनके इस्तीफे को स्वीकार करे या नकारे — यह फैसला जीतू पटवारी और आलाकमान पर निर्भर है। यह पूरा मामला बजट सत्र के बाकी बचे दिनों में विपक्ष की एकजुटता और धार दोनों को प्रभावित कर सकता है।














