मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान बैगा समाज की एक बेटी, अनामिका बैगा, मुख्यमंत्री से अपनी पढ़ाई के लिए मदद मांगने पहुँची थी।
सुरक्षा घेरे के कारण वह मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँच सकी और फूट-फूटकर रोने लगी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लेते हुए बेटी को मदद का पूरा भरोसा दिया है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | बहरी (सिहावल विधानसभा), जिला सीधी |
| छात्रा का नाम | अनामिका बैगा (बैगा आदिवासी समुदाय) |
| समस्या | सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यमंत्री से मिलने से रोका, जिससे वह भावुक होकर रोने लगी। |
| मुख्यमंत्री का आश्वासन | सोशल मीडिया के जरिए NEET की तैयारी और मेडिकल पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा। |
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को सीधी के बहरी में विकास कार्यों के लोकार्पण के लिए पहुँचे थे। अनामिका अपने हाथों में आवेदन लेकर सीएम तक पहुँचना चाहती थी। उसने बताया कि वह पहले भी दो बार कलेक्टर और अपने क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम से मिल चुकी है, लेकिन उसे कहीं से ठोस मदद नहीं मिली।
भावुक पल: जब पुलिसकर्मियों ने उसे मंच की ओर जाने से रोका, तो अनामिका फफक-फफक कर रो पड़ी। उसने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “मेरे पिता मजदूर हैं, वे मुझे नहीं पढ़ा पाएंगे। मैं आदिवासी बैगा समाज की पहली लड़की हूँ जो पढ़ने बाहर निकली है। मुझे बस डॉक्टर बनने के लिए फीस चाहिए।”
सरकार की पहल: अनामिका का वीडियो वायरल होते ही मुख्यमंत्री कार्यालय सक्रिय हुआ। डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘बेटियों की पढ़ाई में धन की कमी आड़े नहीं आएगी।’ 1. NEET कोचिंग: सरकार अनामिका की नीट कोचिंग का खर्च वहन करेगी। 2. मेडिकल फीस: यदि अनामिका का चयन होता है, तो उसकी पूरी मेडिकल पढ़ाई की फीस मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भरी जाएगी। 3. कलेक्टर को निर्देश: स्थानीय प्रशासन को अनामिका के परिवार की अन्य समस्याओं के तत्काल निराकरण के निर्देश भी दिए गए हैं।
निष्कर्ष: अनामिका की यह कहानी प्रदेश की उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है जो गरीबी के कारण अपने सपने छोड़ने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री के इस ‘इंस्टेंट रिस्पॉन्स’ ने संदेश दिया है कि प्रशासन की संवेदनशीलता ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
















