मध्य प्रदेश के एक करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया वित्त वर्ष (2026-27) महंगाई का बड़ा ‘शॉक’ लेकर आ रहा है। प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने 1 अप्रैल 2026 से बिजली की दरों में 10.19% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को सौंपा है।
इस प्रस्ताव के लागू होने पर आम आदमी के मासिक बिल में ₹300 और सालाना बजट में ₹3,600 से अधिक का इजाफा हो सकता है।
प्रस्तावित नई दरें: एक नजर में
यदि नियामक आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो प्रति यूनिट दरों में संभावित बदलाव इस प्रकार होंगे:
| स्लैब (Units) | मौजूदा दर (₹/Unit) | प्रस्तावित दर (₹/Unit) | संभावित वृद्धि |
| 0 – 50 यूनिट | ₹4.45 | ₹4.78 | + 33 पैसे |
| 51 – 150 यूनिट | ₹5.41 | ₹5.82 | + 41 पैसे |
| 151 – 300 यूनिट | ₹6.79 | ₹7.30 | + 51 पैसे |
| 300 यूनिट से अधिक | ₹8.98 | ₹9.89 | + 91 पैसे |
बिजली महंगी करने के 3 मुख्य कारण
- भारी घाटा (Revenue Gap): बिजली कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब ₹6,044 करोड़ के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है। कंपनियों का तर्क है कि इस घाटे की भरपाई के बिना सुचारू आपूर्ति मुश्किल है।
- परिचालन लागत में वृद्धि: कोयले की ढुलाई, पावर परचेज कॉस्ट और मेंटेनेंस के खर्चों में लगातार बढ़ोतरी को आधार बनाया गया है।
- बकाया राशि: सरकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर बकाया राशि का बोझ भी अंततः आम उपभोक्ताओं के टैरिफ पर दबाव डाल रहा है।
जनसुनवाई और विरोध
नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव पर 23 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक ‘हाइब्रिड मोड’ (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में जनसुनवाई आयोजित की है।
- विशेषज्ञों का तर्क: विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र द्वारा कोयले पर ‘क्लीन एनर्जी सेस’ हटाने से बिजली उत्पादन लागत 17-18 पैसे प्रति यूनिट कम होनी चाहिए थी, लेकिन कंपनियां इसका लाभ जनता को देने के बजाय दाम बढ़ा रही हैं।
- अंतिम फैसला: जनसुनवाई में आने वाली आपत्तियों के बाद मार्च के अंत तक आयोग अपना अंतिम आदेश जारी करेगा।

















