भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों पर एक बार फिर कुदरत की मार पड़ी है। प्रदेश के 25 जिलों में प्राकृतिक आपदा के कारण खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे हजारों किसान परिवार गहरे संकट में आ गए हैं। इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल सक्रियता दिखाई और सभी प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को फसल नुकसान का सर्वे कर किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा देने के सख्त निर्देश दिए हैं।
किसानों के लिए क्यों है यह सबसे बड़ी मुसीबत?
यह समझना जरूरी है कि एक किसान के लिए उसकी फसल सिर्फ अनाज नहीं होती — वह पूरे साल की मेहनत, उधार लिए गए बीज-खाद का पैसा और परिवार की उम्मीद होती है। जब फसल प्राकृतिक आपदा से बर्बाद होती है तो किसान के सामने न केवल आजीविका का संकट खड़ा होता है, बल्कि कर्ज के बोझ तले दबने का खतरा भी बढ़ जाता है। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है जहाँ आज भी लाखों परिवारों की रोजी-रोटी सीधे खेती पर निर्भर है, इसलिए 25 जिलों में फसल बर्बादी की यह खबर बेहद चिंताजनक है।
CM मोहन यादव ने क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले में पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित जिलों में तत्काल गिरदावरी यानी फसल नुकसान का सर्वे शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित किसान को मुआवजे से वंचित नहीं रहना चाहिए और राजस्व अमले को जमीन पर उतरकर नुकसान का वास्तविक आकलन करना होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार अन्नदाता के साथ हर मुश्किल घड़ी में खड़ी है और मुआवजे की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाशत नहीं की जाएगी।
कौन-कौन से जिले हैं प्रभावित?
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 25 जिलों में ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और तेज आँधी के कारण गेहूँ, चना, सरसों और अन्य रबी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के कई जिले इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं। हालाँकि प्रभावित जिलों की आधिकारिक सूची प्रशासन की ओर से जारी होना अभी बाकी है, जो सर्वे पूरा होने के बाद सामने आएगी।
मुआवजे की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
यह जानना किसानों के लिए बेहद जरूरी है। जब भी प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होता है तो राज्य सरकार पहले राजस्व विभाग के पटवारियों और तहसीलदारों के जरिए गिरदावरी सर्वे कराती है। इस सर्वे में यह तय होता है कि किस किसान की कितनी जमीन पर कितना नुकसान हुआ है। इसके बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों को बीमा कंपनी से और गैर-बीमित किसानों को राज्य आपदा राहत कोष यानी SDRF से मुआवजा दिया जाता है। मुख्यमंत्री के निर्देश का मतलब है कि यह पूरी प्रक्रिया अब युद्धस्तर पर शुरू हो जाएगी।
विपक्ष की क्या होगी प्रतिक्रिया?
इस तरह की घटनाओं में विपक्ष आमतौर पर सरकार पर सर्वे में देरी और मुआवजे में भेदभाव के आरोप लगाता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का तत्काल एक्शन लेना एक सधा हुआ राजनीतिक कदम भी माना जा सकता है, जो यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के दर्द के प्रति सजग और संवेदनशील है।
किसानों से अपील
जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, वे तत्काल अपने नजदीकी पटवारी या तहसील कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि गिरदावरी सर्वे में उनका नाम शामिल हो सके और उन्हें समय पर मुआवजा मिल सके।














