MP सरकार धार्मिक नगरों में शराबबंदी का ऐतिहासिक फैसला आखिरकार लागू हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वह कर दिखाया जिसका इंतजार सालों से था। प्रदेश के 19 पवित्र शहरों और गांवों में अब शराब की एक भी दुकान नहीं खुलेगी।
MP सरकार धार्मिक नगरों में शराबबंदी — आखिर क्यों लिया यह फैसला?
मध्य प्रदेश में दशकों से यह मांग उठती रही थी कि जहां भगवान का वास है, जहां लाखों श्रद्धालु रोज आते हैं, वहां शराब की दुकानें क्यों? CM मोहन यादव ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए 1 अप्रैल 2025 से यह नियम लागू कर दिया। सरकार का साफ मानना है कि धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री न केवल आस्था का अपमान है बल्कि यह समाज को भी बर्बाद करती है।
किन शहरों में बंद हुई शराब?
MP सरकार धार्मिक नगरों में शराबबंदी के तहत उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, पन्ना, मंडला, मुलताई, मंदसौर और अमरकंटक जैसे पवित्र शहरों को शराबमुक्त घोषित किया गया है। इसके अलावा सलकनपुर, कुंडलपुर और बांदकपुर जैसी प्रसिद्ध ग्राम पंचायतों में भी शराब पूरी तरह बंद है। नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर के दायरे में भी शराब की बिक्री बंद रहेगी।
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CM मोहन यादव ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर साफ और सीधी बात कही —
“जहां-जहां भगवान राम और भगवान कृष्ण के चरण पड़े हैं, वहां शराब की बिक्री बंद होनी ही चाहिए। यह केवल शुरुआत है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल पहला कदम है। धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को नशामुक्त करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ेगी।
क्या घर में भी नहीं पी सकते?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है। जवाब सीधा है — निजी घरों में शराब पीने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन सार्वजनिक जगहों पर शराब पीते पकड़े गए तो कानूनी कार्रवाई तय है। जो दुकानें बंद हुई हैं उन्हें किसी दूसरी जगह नहीं खोला जाएगा — यानी यह बंदी स्थायी है।
उज्जैन के काल भैरव मंदिर का क्या?
उज्जैन में काल भैरव मंदिर में शराब चढ़ाने की पुरानी परंपरा है। सरकार ने इसे भी समझा। बाहर से आने वाले भक्त अपने साथ प्रसाद के लिए शराब ला सकते हैं, लेकिन मंदिर के आसपास कोई दुकान नहीं खुलेगी।
सरकार की कमाई का क्या होगा?
यह सवाल भी जरूरी है। सरकार ने पहले ही इसका हल निकाल लिया। बाकी जगहों पर शराब दुकानों की लाइसेंस फीस 20 प्रतिशत बढ़ा दी गई है। इससे 50 से ज्यादा दुकानें बंद होने के बाद भी सरकार की कमाई पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। इस साल शराब से कुल कमाई 16,800 करोड़ रुपये तक रहने का अनुमान है।
एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| फैसला लागू | 1 अप्रैल 2025 |
| कुल शहर/क्षेत्र | 19 |
| बंद दुकानें | 50+ |
| नर्मदा तट | 5 KM बंद |
| घर में पीना | अनुमति है |
| सार्वजनिक स्थान | पूरी तरह बंद |
आगे क्या होगा?
MP सरकार धार्मिक नगरों में शराबबंदी का यह पहला चरण है। CM मोहन यादव के बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में यह नीति और शहरों तक फैलेगी। समाज में खासकर महिलाओं और बुजुर्गों ने इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया है।
MP सरकार धार्मिक नगरों में शराबबंदी आखिरकार सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं है — यह उन लाखों परिवारों की जीत है जो सालों से शराब की तबाही झेलते रहे।
















