भारत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत का पहला ‘ट्विन-ट्यूब टनल’ (Twin-Tube Tunnel) प्रोजेक्ट न केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार है, बल्कि यह यात्रा के समय को इस कदर कम कर देगा कि जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली यह सुरंग पूर्वोत्तर भारत (North-East India) की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल देगी। यहाँ इस मेगा प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी दी गई है:
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं: नदी के नीचे रोमांचक सफर
यह सुरंग असम में नुमालीगढ़ और गोहपुर को आपस में जोड़ेगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘ट्विन-ट्यूब’ डिजाइन है।
| विशेषता | विवरण (Details) |
| स्थान | ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे (असम) |
| लंबाई | लगभग 12 से 15 किलोमीटर |
| समय की बचत | 6 घंटे का सफर अब मात्र 20 मिनट में। |
| डिजाइन | ट्विन-ट्यूब (दो अलग-अलग सुरंगें) |
इस प्रोजेक्ट को ‘मल्टी-मोडल टनल’ कहा जा रहा है क्योंकि इसमें परिवहन के दो अलग-अलग माध्यमों को एक साथ जोड़ा गया है:
- ऊपर कार, नीचे ट्रेन: इस टनल के एक ट्यूब (सुरंग) का उपयोग वाहनों (कार, बस, ट्रक) के लिए किया जाएगा, जबकि दूसरे ट्यूब में रेल पटरी बिछाई जाएगी। यह भारत में अपनी तरह का पहला प्रयोग है जहाँ पानी के नीचे सड़क और रेल मार्ग साथ-साथ चलेंगे।
- रणनीतिक महत्व: यह टनल अरुणाचल प्रदेश और चीन सीमा के करीब होने के कारण सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। युद्ध जैसी स्थिति में भारी टैंक, मिसाइलें और सैनिक बिना किसी बाधा के बहुत कम समय में नदी पार कर सकेंगे।
- मौसम का असर नहीं: ब्रह्मपुत्र नदी में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ के कारण यातायात महीनों तक बाधित रहता है। नदी के नीचे बनी यह सुरंग हर मौसम में चालू रहेगी।
- इंजीनियरिंग चुनौती: ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल और तेज बहाव वाली नदी के नीचे खुदाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए दुनिया की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का उपयोग किया जाएगा।
यात्रा पर प्रभाव: 6 घंटे बनाम 20 मिनट
वर्तमान में, नुमालीगढ़ से गोहपुर जाने के लिए पुलों के माध्यम से एक लंबा चक्कर काटना पड़ता है, जिसमें लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। इस टनल के बनने से यह दूरी सिमट जाएगी और यात्री केवल 20 मिनट में नदी के दूसरी पार होंगे। इससे ईंधन की भारी बचत होगी और व्यापार को नई गति मिलेगी।
















