मध्य प्रदेश के पूर्व अपर मुख्य सचिव (ACS) और वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी मनोज श्रीवास्तव के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अपनी बौद्धिक क्षमता और लेखन के लिए पहचाने जाने वाले श्रीवास्तव ने इस बार ब्राह्मण समाज की वर्तमान स्थिति और उनके प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को लेकर एक तीखा बयान जारी किया है, जिसे सोशल मीडिया पर ‘चीखती आवाज़ें’ के रूप में देखा जा रहा है।
मनोज श्रीवास्तव का बयान: मुख्य बिंदु
पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपने पोस्ट में ब्राह्मणों के प्रति समाज के एक वर्ग के व्यवहार और ऐतिहासिक संदर्भों पर सवाल उठाए हैं। उनके बयान के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:
- उत्पीड़न का आरोप: उन्होंने संकेत दिया कि आधुनिक विमर्श में ब्राह्मणों को “सॉफ्ट टारगेट” बनाया जा रहा है और उनकी उपलब्धियों को दरकिनार कर केवल आलोचना पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- बौद्धिक विरासत: उन्होंने तर्क दिया कि ब्राह्मणों ने सदियों तक ज्ञान और संस्कृति का संरक्षण किया, लेकिन आज उन्हें ही दोषपूर्ण व्यवस्था का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
- राजनीतिक उपेक्षा: बयान में यह भी झलकता है कि राजनीतिक दल ब्राह्मणों का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में करते हैं, लेकिन जब उनके सम्मान की बात आती है, तो सभी चुप्पी साध लेते हैं।
एक पूर्व शीर्ष नौकरशाह, जो लंबे समय तक सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर रहे हों, उनके द्वारा इस तरह का मुखर और भावनात्मक बयान आना चर्चा का विषय बन गया है।
बयान के बाद उपजी प्रतिक्रियाएं:
- ब्राह्मण संगठनों का समर्थन: परशुराम सेना और अन्य ब्राह्मण संगठनों ने मनोज श्रीवास्तव के साहस की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि पहली बार किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति ने समाज के भीतर दबे हुए आक्रोश को स्वर दिया है।
- विपक्षी दलों की घेराबंदी: कुछ राजनीतिक दलों ने इसे जातिगत विद्वेष फैलाने वाला बयान बताया है। उनका तर्क है कि एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी को सभी वर्गों के बीच सामंजस्य की बात करनी चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में भावनात्मक कार्ड खेलना चाहिए।
- सोशल मीडिया पर बहस: सोशल मीडिया पर ‘चीखती आवाज़ें’ (Screaming Voices) नाम से उनके विचारों को साझा किया जा रहा है। लोग इसे “ब्राह्मण अस्मिता” की नई लड़ाई के रूप में देख रहे हैं। [Image showing a collage of social media posts debating the caste-based statement]
- प्रशासनिक गलियारों में चर्चा: सेवानिवृत्त और सेवारत आईएएस अधिकारियों के बीच भी यह बयान चर्चा में है, क्योंकि श्रीवास्तव की गिनती हमेशा से एक गंभीर और सुलझे हुए अधिकारी के रूप में होती रही है।
निष्कर्ष: मनोज श्रीवास्तव का यह बयान केवल एक सामाजिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश में बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों की ओर भी इशारा करता है। चुनाव से पहले इस तरह के मुद्दों का उठना अक्सर ध्रुवीकरण की स्थिति पैदा करता है।

















