भोपाल। मध्यप्रदेश में एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ एक सरकारी हॉस्टल में रहने वाली कई छात्राएं घातक बीमारी पीलिया (Jaundice) की चपेट में आ गई हैं। इस मामले ने प्रशासन की लापरवाही और हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था को एक बार फिर उजागर कर दिया है। वहीं इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) ने जमकर हंगामा किया और प्रशासन से जवाब माँगा।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को पिछले कुछ दिनों से बुखार, उल्टी, आँखें पीली होना और शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो रहे थे। जब इनकी जाँच कराई गई तो पता चला कि ये सभी पीलिया से पीड़ित हैं। पीलिया एक ऐसी बीमारी है जो मुख्यतः दूषित पानी और संक्रमित भोजन के सेवन से फैलती है, और समय पर इलाज न होने पर यह लिवर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक हॉस्टल में लंबे समय से पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आ रही थीं, लेकिन प्रशासन ने इन शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी लापरवाही का नतीजा अब छात्राओं की सेहत के रूप में सामने आया है।
NSUI ने क्यों किया हंगामा?
NSUI कार्यकर्ताओं ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हॉस्टल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। NSUI नेताओं का कहना है कि सरकारी हॉस्टल में रहने वाली ये छात्राएं ज्यादातर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं, जो पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर रहती हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें साफ पानी और स्वस्थ वातावरण मिले। संगठन ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रशासन की क्या है प्रतिक्रिया?
फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालाँकि बताया जा रहा है कि पीड़ित छात्राओं को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है। पानी की गुणवत्ता की जाँच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन यह कदम तब उठाया गया जब मामला सार्वजनिक हो चुका था।
पीलिया कितना खतरनाक है?
डॉक्टरों के अनुसार पीलिया कोई सामान्य बीमारी नहीं है। यह हेपेटाइटिस A और E वायरस के संक्रमण से होती है जो दूषित पानी और खाने के जरिए तेजी से फैलती है। अगर एक ही जगह रहने वाले कई लोगों को एक साथ पीलिया हो तो यह सामूहिक प्रकोप (Outbreak) की स्थिति मानी जाती है, जिसे स्वास्थ्य विभाग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
क्या कहती है स्थिति?
यह मामला केवल एक हॉस्टल की समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में सरकारी छात्रावासों की बदहाल स्थिति का आईना है। जब तक पानी की शुद्धता, साफ-सफाई और नियमित स्वास्थ्य जाँच को अनिवार्य नहीं बनाया जाता, तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।

















