कभी रोज़ी-रोटी के लिए मजदूरी करने वाली एक महिला आज शहद के व्यवसाय से आत्मनिर्भर बन चुकी है। मेहनत, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से उसने मधुमक्खी पालन को अपनाया और आज हर महीने अच्छा मुनाफा कमा रही है।
शुरुआत में सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद महिला ने हार नहीं मानी। प्रशिक्षण लेने के बाद कुछ बॉक्स से मधुमक्खी पालन शुरू किया। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ा और शुद्ध शहद की मांग ने उसके कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
आज महिला न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही है। स्थानीय बाजार के साथ-साथ अब उसका शहद बाहर के जिलों में भी सप्लाई किया जा रहा है।
















