कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और संगठन को मज़बूत करने की कवायद एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पार्टी द्वारा शुरू किया गया ‘टैलेंट सर्च’ (Talent Search) अभियान, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर काबिल नेताओं को आगे लाना था, अब खुद पार्टी के लिए सिरदर्द बन गया है।
सोशल मीडिया पर एक स्थानीय नेता का रोते हुए वीडियो वायरल होने के बाद इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
| विवरण | मुख्य जानकारी |
| अभियान का नाम | कांग्रेस टैलेंट सर्च (संगठन विस्तार हेतु) |
| विवाद का केंद्र | चयन प्रक्रिया में पक्षपात और “पैराशूट लैंडिंग” के आरोप। |
| ट्रिगर पॉइंट | एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का इंटरव्यू के बाद फूट-फूट कर रोना। |
| पार्टी की स्थिति | बचाव की मुद्रा में, डैमेज कंट्रोल की कोशिश। |
कांग्रेस ने दावा किया था कि इस अभियान के जरिए बिना किसी सिफारिश के योग्य कार्यकर्ताओं को पदों पर नियुक्त किया जाएगा। लेकिन हकीकत इसके उलट नज़र आ रही है।
घटनाक्रम की मुख्य बातें:
- इंटरव्यू में अपमान का आरोप: वायरल वीडियो में एक निष्ठावान कार्यकर्ता यह कहते हुए रो रहे हैं कि उन्होंने 20 साल पार्टी को दिए, लेकिन इंटरव्यू के नाम पर उन्हें अपमानित किया गया। उनसे ऐसे सवाल पूछे गए जिनका संगठन के काम से कोई लेना-देना नहीं था।
- नेताओं की ‘सेटिंग’: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टैलेंट सर्च केवल एक दिखावा है। जिन लोगों के नाम बड़े नेताओं की ‘गुड बुक्स’ में हैं, उन्हें पहले ही चुन लिया गया है। ‘सर्च’ केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है।
- सोशल मीडिया पर किरकिरी: बीजेपी और अन्य विरोधी दलों ने इस वीडियो को लपक लिया है। उनका कहना है कि जो पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के आंसू नहीं पोंछ सकती, वह जनता का क्या भला करेगी?
कार्यकर्ताओं का आक्रोश: कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने इस प्रक्रिया का बहिष्कार करने की धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर ‘टैलेंट’ का पैमाना केवल चाटुकारिता है, तो फिर इस सर्च ड्रामे की क्या ज़रूरत थी?















