छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर स्थित कबीरपंथ के प्रमुख तीर्थ दामाखेड़ा में आयोजित ‘सतगुरु कबीर संत समागम समारोह’ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कबीरपंथ की सामाजिक समरसता और शांति के संदेश की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की शांतिप्रिय धरा पर कबीरपंथ का व्यापक और गहरा प्रभाव है, जो समाज को एकता के सूत्र में पिरोता है।
| विवरण | जानकारी (Details) |
| अवसर | माघ पूर्णिमा के पावन पर्व पर वार्षिक संत समागम |
| मुख्य अतिथि | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय |
| मेजबान | पंथश्री हुजूर प्रकाशमुनि नाम साहेब (कबीरपंथ के वर्तमान गुरु) |
| स्थान | दामाखेड़ा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा (छत्तीसगढ़) |
| प्रमुख घोषणा | दामाखेड़ा को ‘पवित्र तीर्थ स्थल’ घोषित करने और बुनियादी ढांचे के विकास हेतु बजट |
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि कबीरपंथ केवल एक संप्रदाय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवनशैली का अभिन्न अंग है।
मुख्यमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें:
- शांति और भाईचारा: मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को ‘शांति का टापू’ कहा जाता है और इसमें कबीरपंथ की शिक्षाओं का बड़ा योगदान है। कबीर साहेब के दोहे और संदेश आज भी जाति-पाति के भेदभाव को मिटाने में पथप्रदर्शक हैं।
- दामाखेड़ा का वैश्विक महत्व: दामाखेड़ा विश्वभर के कबीरपंथियों की आस्था का केंद्र है। मुख्यमंत्री ने कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने यहाँ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नया विश्राम गृह, बेहतर सड़क संपर्क और पेयजल परियोजनाओं के लिए धन आवंटित करने की घोषणा की।
- युवाओं को संदेश: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कबीर साहेब के सत्य, अहिंसा और सादगी के मार्ग पर चलें ताकि एक नशामुक्त और सशक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण हो सके।
- ऐतिहासिक विरासत: मुख्यमंत्री ने दामाखेड़ा की गद्दी के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि संतों के तप से पवित्र हुई है और यहाँ की ‘साखी’ और ‘भजन’ प्रदेश की अनमोल सांस्कृतिक विरासत हैं।
दामाखेड़ा का धार्मिक महत्व
दामाखेड़ा को कबीरपंथ का ‘मक्का-मदीना’ माना जाता है। यहाँ कबीर साहेब के वंश गद्दी के गुरुओं का निवास है। माघ पूर्णिमा के दौरान यहाँ देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु ‘गुरु दर्शन’ के लिए आते हैं। इस दौरान होने वाला ‘चौका आरती’ कार्यक्रम आध्यात्मिक आकर्षण का मुख्य केंद्र होता है।
















