भोपाल। मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कहा कि उनकी सरकार महान संत बाबा गुरू घासीदास जी के बताए हुए मार्ग पर चलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बाबा घासीदास जी ने सदियों पहले जो सत्य, समानता, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया था, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है और सरकार की नीतियों की नींव उन्हीं आदर्शों पर टिकी हुई है।
कौन थे बाबा गुरू घासीदास जी?
यह समझना जरूरी है कि इस बयान का महत्व क्यों इतना गहरा है। बाबा गुरू घासीदास जी का जन्म 18 दिसंबर 1756 को छत्तीसगढ़ के गिरौदपुरी में हुआ था। वे सतनाम पंथ के संस्थापक थे और उन्होंने समाज में व्याप्त जातिभेद, छुआछूत और असमानता के खिलाफ एक जन आंदोलन खड़ा किया था। उनका प्रमुख संदेश था — “सतनाम ही सत्य है” — यानी ईश्वर एक है, सभी मनुष्य समान हैं। उनके इन्हीं विचारों ने लाखों वंचित और पिछड़े वर्ग के लोगों को आत्मसम्मान और एक नई पहचान दी। आज भी छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सतनामी समाज उनके प्रति अटूट श्रद्धा रखता है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा घासीदास जी ने हमें सिखाया कि सेवा, सत्य और न्याय ही असली शासन का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए जो भी योजनाएं चला रही है, वे सब बाबा जी के उन्हीं आदर्शों की व्यावहारिक अभिव्यक्ति हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाबा घासीदास जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है और उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है।
सतनामी समाज के लिए इस बयान का क्या मतलब है?
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो मुख्यमंत्री का यह बयान सतनामी और पिछड़े वर्ग के समाज को एक स्पष्ट संदेश देता है कि सरकार उनकी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक पहचान का सम्मान करती है। बाबा घासीदास जी के अनुयायियों की संख्या मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में लाखों में है, इसलिए उनके नाम और विचारों को सरकारी नीतियों से जोड़ना एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदेश है।
समाज में क्यों जरूरी हैं बाबा घासीदास जी के विचार?
आज के दौर में जब समाज में असमानता, भेदभाव और वैमनस्य की घटनाएं थमने का नाम नहीं लेतीं, बाबा घासीदास जी का दर्शन और भी प्रासंगिक हो जाता है। उनका यह विचार कि हर इंसान की गरिमा एक समान है — चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या पृष्ठभूमि से आता हो — आज की सरकारों के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है। मुख्यमंत्री का यह बयान इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
















